इनसे बचें
- गहरे बैकबेंड (उष्ट्रासन, धनुरासन, चक्रासन, ऊँचा भुजंगासन, पैर ऊँचे उठाकर शलभासन), ज़ोरदार मरोड़ और हर वह गति जो कमर को पीछे मोड़े या उस पर खिंचाव डाले। पेट को हल्का कसा रखें और सेतुबंध नीचा रखें। पैरों में कमज़ोरी, सुन्नपन या पेशाब-मल में बदलाव होने पर डॉक्टर को दिखाएँ।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या स्पॉन्डिलोलिस्थीसिस में योग फ़ायदेमंद है?
कोर पर केंद्रित हल्का योग कम ग्रेड वाले स्पॉन्डिलोलिस्थीसिस में कई लोगों की मदद कर सकता है, क्योंकि यह रीढ़ को स्थिर रखने वाली मांसपेशियों को मज़बूत करता है। गहरे बैकबेंड और ज़ोरदार मरोड़ से बचें, और पहले अपने डॉक्टर या फ़िज़ियोथेरेपिस्ट से पूछें।
स्पॉन्डिलोलिस्थीसिस में किन योगासनों से बचना चाहिए?
उष्ट्रासन, धनुरासन, चक्रासन, ऊँचा भुजंगासन, ऊर्ध्व मुख श्वानासन, ऊँचा शलभासन, गहरे लंज, खड़े होकर बैकबेंड और ज़ोरदार या हाथों से खींचकर किए गए मरोड़ से बचें। कूदने और भारी वज़न उठाने से भी बचें।
स्पॉन्डिलोलिस्थीसिस के लिए सबसे अच्छे व्यायाम कौन-से हैं?
पेल्विक टिल्ट, नीचा सेतुबंधासन, घुटनों को छाती से लगाना, पट्टे से हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच, और ऐसे कोर व्यायाम जिनमें रीढ़ स्थिर रहे और हाथ-पैर चलें। फ़िज़ियोथेरेपिस्ट इन्हें आपके ग्रेड के हिसाब से ढाल सकते हैं।
क्या योग से स्पॉन्डिलोलिस्थीसिस ठीक हो सकता है?
नहीं। योग खिसकी हुई कशेरुका को वापस अपनी जगह नहीं ला सकता। यह दर्द कम कर सकता है और ताकत व नियंत्रण बढ़ा सकता है, और कम ग्रेड वाले ज़्यादातर लोगों को इसी की ज़रूरत होती है।
स्पॉन्डिलोलिस्थीसिस में आगे झुकने से बचें या पीछे झुकने से?
ज़्यादातर लोगों को पीछे झुकना (एक्सटेंशन) ज़्यादा दर्द देता है, इसलिए आमतौर पर आगे झुकने वाले व्यायामों से शुरुआत की जाती है। घिसाव से हुए खिसकाव वाले कुछ लोगों को भार के साथ आगे झुकना भी अच्छा नहीं लगता; अपने लक्षणों और फ़िज़ियोथेरेपिस्ट की सलाह के अनुसार चलें।
क्या ग्रेड 2 स्पॉन्डिलोलिस्थीसिस में योग कर सकते हैं?
अक्सर हाँ, छोटे आसनों के साथ, बिना गहरे बैकबेंड के और फ़िज़ियोथेरेपिस्ट द्वारा जाँचे गए कार्यक्रम के साथ। ग्रेड 3 और 4 में पहले विशेषज्ञ की सलाह ज़रूरी है।
स्पॉन्डिलोलिस्थीसिस में सर्जरी की ज़रूरत कब पड़ती है?
सर्जरी पर तब विचार किया जाता है जब खिसकाव ऊँचे ग्रेड का हो या बढ़ रहा हो, नस दबने से पैर में दर्द या कमज़ोरी हो, या महीनों के अच्छे बिना-सर्जरी इलाज के बाद भी दर्द कम न हो।
योग इलाज में सहायक है, उसकी जगह नहीं लेता। डॉक्टर की लिखी दवाएँ लेते रहें और शुरू करने से पहले डॉक्टर से बात करें, खासकर अगर आपको हृदय रोग, अनियंत्रित ब्लड प्रेशर, हाल ही में सर्जरी, गर्भावस्था, मिर्गी या तेज़ दर्द हो।
