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शोक के लिए योग: किसी को खोने के बाद के भारी दिनों के लिए कोमल अभ्यास

शोक कोई समस्या नहीं जिसे ठीक करना हो। यह अभ्यास आपके शरीर को उसे रखने की सुरक्षित जगह देता है: धीमी मुद्राएँ, हल्की गुंजन वाली श्वास और आराम करने या रो लेने की छूट।

Child’s Pose
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शोक के लिए योग: किसी को खोने के बाद के भारी दिनों के लिए कोमल अभ्यासआसन: 9
चलाएँ दबाइए। गाइड हर आसन 3D में दिखाता है और बोलकर समझाता है। आकृति को उँगली या माउस से घुमाइए।
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    इनसे बचें

    • ज़बरदस्ती शांत होना या भावनाओं को दबाना; मैट पर आँसू आना सामान्य है। अगर शोक के कारण ख़ुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आएँ, हफ़्तों तक खाना या नींद छूट जाए, या महीनों बाद भी हल्का न हो, तो मदद लें।

    पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

    क्या योग शोक में मदद करता है?

    यह शोक के शारीरिक पहलुओं में मदद कर सकता है, जैसे सीने में जकड़न, बेचैनी, खराब नींद और घबराहट। ख़ास तौर पर शोक पर योग का शोध अभी कम है, इसलिए इसे भरोसेमंद लोगों के साथ और ज़रूरत हो तो शोक परामर्श (ग्रीफ़ काउंसलिंग) के साथ अपनाएँ।

    शोक और दुःख के लिए सबसे अच्छे योगासन कौन से हैं?

    कोमल, सहारे वाले आसन: बालासन, दिल पर हाथ रखकर सुखासन, तकियों के साथ सुप्त बद्धकोणासन, मार्जरी–बिटिलासन, नीचा सेतुबंधासन, अपानासन (घुटने छाती की ओर) और शवासन। इनके साथ भ्रामरी (गुंजन) श्वास करें।

    क्या योग के दौरान रोना सामान्य है?

    हाँ। धीमी श्वास और छाती खुलने से भावनाएँ ऊपर आ सकती हैं। आँसुओं को आने दें, बालासन में आराम करें और मन हो तो आगे बढ़ें या रुक जाएँ। दोनों में कुछ ग़लत नहीं।

    रोज़मर्रा में शोक और दुःख से कैसे निपटूँ?

    छोटी दिनचर्या बनाए रखें: समय पर भोजन, थोड़ी हलचल, धूप, नींद और अपनों के साथ समय। पाँच मिनट का श्वास अभ्यास या छोटा योग सत्र हर दिन को एक शांत पल देता है। धैर्य रखें; शोक लहरों में आता है।

    क्या योग निद्रा शोक में अच्छी है?

    हाँ, बहुत से लोगों के लिए। योग निद्रा लेटकर किया जाने वाला निर्देशित विश्राम है, इसलिए यह शोक से आई थकान के अनुकूल है और नींद में मदद कर सकती है। अगर स्थिर लेटना भारी लगे, तो आँखें खुली रखें या बैठकर करें।

    क्या योग दिल टूटने में मदद कर सकता है?

    योग रिश्ता टूटने के तनाव और बेचैनी को कम कर सकता है, और रोज़ की दिनचर्या उबरने में मदद करती है। यह भावनाओं को मिटाएगा नहीं, पर जब तक समय अपना काम करता है, उनके साथ जीना आसान बना सकता है।

    शोक कब सामान्य से ज़्यादा होता है?

    अगर कई महीनों तक ज़्यादातर दिन तीव्र तड़प या पीड़ा में बीतें, या आप घर या काम पर सामान्य रूप से काम न कर पाएँ, तो डॉक्टर से बात करें। लंबे समय तक चलने वाला शोक विकार और अवसाद का इलाज संभव है। ख़ुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आएँ तो तुरंत मदद लें।

    योग इलाज में सहायक है, उसकी जगह नहीं लेता। डॉक्टर की लिखी दवाएँ लेते रहें और शुरू करने से पहले डॉक्टर से बात करें, खासकर अगर आपको हृदय रोग, अनियंत्रित ब्लड प्रेशर, हाल ही में सर्जरी, गर्भावस्था, मिर्गी या तेज़ दर्द हो।

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