इनसे बचें
- बुखार या ताज़ा छाती के संक्रमण में ज़ोरदार अभ्यास — इसकी जगह आराम करें। खाँसी के दौरान तेज़ श्वास (कपालभाति, भस्त्रिका) छोड़ दें। तीन दिन से ज़्यादा बुखार, बलगम में ख़ून, छाती में दर्द, घरघराहट या आराम करते हुए भी साँस फूलने पर डॉक्टर को दिखाएँ।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ब्रोंकाइटिस में योग अच्छा है?
हल्का योग और धीमी श्वास साँस लेना आसान बना सकते हैं, और COPD (जिसमें क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस शामिल है) के ट्रायल में फेफड़ों की कार्यक्षमता और चलने की क्षमता बेहतर दिखी। एक्यूट ब्रोंकाइटिस में योग संक्रमण का इलाज नहीं करता, इसलिए बुखार रहने तक आराम करें।
ब्रोंकाइटिस के लिए सबसे अच्छे योगासन कौन से हैं?
सुखासन में आसान श्वास, ऊर्ध्व हस्तासन, मार्जरी–बितिलासन, हल्का भुजंगासन, सेतुबंधासन, मकरासन और शवासन। ये बिना ज़ोर के छाती खोलते हैं और साँस की मांसपेशियों को ढीला करते हैं।
क्या छाती के संक्रमण में योग कर सकते हैं?
बुखार या तबीयत ख़राब रहने तक नहीं। आराम करें, तरल पिएँ और केवल धीमी श्वास करें। बुखार उतरने के बाद हल्के आसनों पर लौटें।
छाती की जकड़न के लिए कौन सा श्वास व्यायाम सबसे अच्छा है?
साँस को शांत करने के लिए धीमी पेट से श्वास और भ्रामरी, उसके बाद बलगम ऊपर लाने के लिए "हफ़िंग" (खुले मुँह से ज़ोर से साँस बाहर निकालना)। खाँसी के दौरान कपालभाति से बचें।
ब्रोंकाइटिस की खाँसी को कैसे शांत करें?
सीधे बैठें, नाक से धीरे साँस लें, गुनगुना पानी या शहद वाला गर्म पेय घूँट-घूँट पिएँ, और धुएँ से बचें। अगर खाँसी 3 हफ़्ते से ज़्यादा चले या खाँसी में ख़ून आए, तो डॉक्टर को दिखाएँ।
क्या योग क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस ठीक कर सकता है?
नहीं। क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस COPD का हिस्सा है और योग से ख़त्म नहीं होता। धूम्रपान छोड़ना, दवाएँ और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन मुख्य इलाज हैं; योग एक मददगार सहायक हो सकता है।
ब्रोंकाइटिस के लिए कितनी बार योग करना चाहिए?
हफ़्ते में तीन से पाँच बार 20–30 मिनट, साथ में रोज़ टहलना। ज़्यादातर COPD ट्रायल 8–12 हफ़्ते या उससे ज़्यादा चले।
क्या योग सर्दी-खाँसी में मदद करता है?
हल्की श्वास और आराम से आप ज़्यादा आराम महसूस कर सकते हैं, लेकिन इससे सर्दी जल्दी ठीक नहीं होती। अभ्यास हल्का रखें और तबीयत ख़राब लगे तो आराम करें।
योग इलाज में सहायक है, उसकी जगह नहीं लेता। डॉक्टर की लिखी दवाएँ लेते रहें और शुरू करने से पहले डॉक्टर से बात करें, खासकर अगर आपको हृदय रोग, अनियंत्रित ब्लड प्रेशर, हाल ही में सर्जरी, गर्भावस्था, मिर्गी या तेज़ दर्द हो।
