इस चक्र पर कैसे काम करें
- सिर को धीरे-धीरे घुमाकर और हल्के साइड स्ट्रेच से गर्दन को ढीला करें; गर्दन पर कभी ज़ोर न डालें।
- सेतुबंधासन और सहारे वाले मत्स्यासन से गले के सामने का हिस्सा खोलें, फिर तीन बार सिंहासन करें।
- सीधे बैठें, हाथ शंख मुद्रा में रखें और गुंजन वाली भ्रामरी श्वास के पाँच चक्र करें।
- ध्यान गले में टिकाएँ और एक साफ़ आसमानी नीली रोशनी की कल्पना करें।
- हर बाहर जाती साँस पर एक बार, धीरे-धीरे ज़ोर से हं का जाप करें, लगभग नौ से बारह बार।
- मन ही मन जाप जारी रखें और हर ध्वनि के बाद आने वाली शांति को सुनें।
- अंत में कुछ मिनट शांत बैठें और एक घूँट पानी पिएँ।
संतुलन के लक्षण
- स्पष्ट और विनम्रता से बोलना
- ध्यान से सुनना
- ना कह पाना
- गाने, जाप करने या लिखने का आनंद
असंतुलन के लक्षण (पारंपरिक दृष्टि)
- अपनी बात कहने या शब्द ढूँढने में कठिनाई
- ज़्यादा बोलना या न सुनना
- जो सच में सोचते हैं उसे दबा लेना
- जबड़े, गर्दन और कंधों में तनाव
पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कंठ चक्र किससे जुड़ा है?
योग परंपरा में कंठ चक्र अभिव्यक्ति, श्रवण और शुद्धि से जुड़ा है: सच को विनम्रता से कहना और दूसरों को पूरी तरह सुनना। इसका तत्व आकाश और इंद्रिय श्रवण है। ये पारंपरिक और मनोवैज्ञानिक विचार हैं, चिकित्सकीय कार्य नहीं।
कैसे पता करें कि मेरा कंठ चक्र अवरुद्ध है?
परंपरा ऐसी आदतों की ओर इशारा करती है जैसे अपनी बात दबा लेना, ना कहना कठिन लगना, या बिना सुने बोलते जाना। गले या गर्दन के शारीरिक लक्षणों के लिए, खासकर अगर वे बने रहें, चक्र अभ्यास नहीं, डॉक्टर की ज़रूरत है। पारंपरिक अर्थ में कंठ चक्र को ठीक करने के लिए इस पेज का दैनिक क्रम अपनाएँ।
विशुद्ध चक्र को संतुलित होने में कितना समय लगता है?
कोई तय समय नहीं है। ज़्यादातर शिक्षक कम से कम चार से छह हफ़्ते तक रोज़ 10 से 15 मिनट श्वास, जाप और शांत श्रवण का सुझाव देते हैं, और यह देखने को कहते हैं कि आपके बोलने और सुनने में छोटे बदलाव आ रहे हैं या नहीं।
विशुद्ध चक्र की पारंपरिक शक्तियाँ या सिद्धियाँ क्या हैं?
पुराने ग्रंथ बताते हैं कि इस केंद्र पर ध्यान करने वाला कवि या ज्ञानी, शांत और शोक-मुक्त हो जाता है, और योग सूत्र कंठ पर एकाग्रता को भूख-प्यास से मुक्ति से जोड़ते हैं। ये गहरे ध्यान का प्रतीकात्मक वर्णन हैं; वादे नहीं।
कौन-सा देश विशुद्धि चक्र का प्रतिनिधित्व करता है?
यह विचार सहज योग से आता है, जिसके संस्थापक ने चक्रों को दुनिया के क्षेत्रों से जोड़ा और विशुद्धि के लिए उत्तरी अमेरिका का नाम लिया। यह उस आंदोलन की मान्यता है और शास्त्रीय योग ग्रंथों में नहीं मिलती।
कंठ चक्र के लिए सबसे अच्छा प्राणायाम कौन-सा है?
उज्जायी (समुद्री श्वास) और भ्रामरी (भौंरे जैसी गुंजन श्वास) आम तौर पर चुने जाते हैं, और उद्गीथ (ॐ जाप वाली श्वास) तीसरा विकल्प है। तीनों सौम्य हैं और बिना ज़ोर लगाए करने पर शुरुआती लोगों के लिए उपयुक्त हैं।
चक्र और कुंडलिनी योग और तंत्र परंपरा से आते हैं। ये शरीर-रचना की संरचनाएँ नहीं हैं और ये विवरण चिकित्सा दावे नहीं हैं। कोमलता से अभ्यास करें और तबीयत ठीक न लगे तो रुक जाएँ।
