कैसे करें, चरण-दर-चरण
- सुखासन, वज्रासन या कुर्सी पर सीधे बैठें। हाथ घुटनों पर रखें, जबड़ा ढीला करें और आंखें बंद करें।
- जब टाइमर कहे “सांस लें”, तो नाक से 4 सेकंड तक धीमी, गहरी सांस लें — पहले पेट, फिर छाती भरें।
- जब कहे “गुनगुनाते हुए छोड़ें”, तो मुंह को ढीले “ओ” के आकार में खोलें और लगभग 7 सेकंड तक लंबा, स्थिर “ओ‑ओ‑ओ” बोलें।
- 10 सेकंड की सांस के आख़िरी 3 सेकंड में होंठ धीरे से बंद करें और ध्वनि को “म‑म‑म” में बदलने दें। होंठों, चेहरे और सिर में कंपन महसूस करें।
- आवाज़ आरामदायक रखें और सुर नीचा व एक-सा रखें। आख़िरी हवा ज़ोर लगाकर बाहर न धकेलें।
- 7 राउंड (2 मिनट से कम) दोहराएं, फिर एक मिनट आंखें बंद करके चुपचाप बैठें और स्थिरता को महसूस करें।
लाभ
- 10 सेकंड की लंबी सांस छोड़ने से सांस लगभग चार प्रति मिनट हो जाती है, जिससे शरीर को आराम मिलता है
- स्थिर ध्वनि मन को एक केंद्र देती है, इसलिए यह ध्यान में प्रवेश का सरल रास्ता है
- गुनगुनाता “म” चेहरे और सिर में हल्का कंपन पैदा करता है, जो बहुत से लोगों को सुकून देता है
- लंबी, नियंत्रित सांस छोड़ना सिखाता है, जो गायकों और वक्ताओं के सांस नियंत्रण में भी मदद करता है
- ओम उच्चारण पर छोटे अध्ययन शांत करने वाले प्रभाव बताते हैं; बड़े शोध की अभी ज़रूरत है
सावधानियाँ
- आवाज़ कोमल रखें; गले में दर्द या खिंचाव लगे तो रुक जाएं, और लैरिन्जाइटिस में आवाज़ को आराम दें
- सिर हल्का लगे तो उच्चारण छोटा करें और राउंड के बीच कुछ सामान्य सांसें लें
- नाक बंद हो तो मुंह से धीरे सांस लें और राउंड छोटे रखें
- ओम उच्चारण तनाव या चिंता के इलाज में सहायक है, पर दवा या थेरेपी की जगह नहीं लेता
पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
उद्गीथ प्राणायाम क्या है?
उद्गीथ प्राणायाम एक श्वास अभ्यास है जिसमें नाक से गहरी सांस लेकर सांस छोड़ते समय लंबा “ओम” उच्चारण किया जाता है। संस्कृत में इसका अर्थ है “गाई गई सांस”।
उद्गीथ प्राणायाम चरण-दर-चरण कैसे करें?
सीधे बैठें, आंखें बंद करें और नाक से 4 सेकंड सांस लें। सांस छोड़ते हुए लगभग 7 सेकंड “ओ‑ओ‑ओ” और लगभग 3 सेकंड “म‑म‑म” बोलें। 7–11 बार दोहराएं, फिर चुपचाप बैठें।
भ्रामरी और उद्गीथ में क्या अंतर है?
भ्रामरी में मुंह बंद रखकर भौंरे जैसी गुनगुनाहट की जाती है, अक्सर कान हल्के से बंद करके। उद्गीथ में कान खुले रहते हैं और ओम बोला जाता है — “ओ” के लिए मुंह खुला और “म” के लिए बंद।
क्या उद्गीथ प्राणायाम के कोई दुष्प्रभाव हैं?
बहुत कम। बहुत ज़ोर से बोलने से गला थक सकता है, और सांस ज़बरदस्ती बाहर धकेलने से सिर हल्का लग सकता है। ध्वनि कोमल और आरामदायक रखें।
उद्गीथ कितनी देर करना चाहिए?
तीन से दस मिनट, यानी 7–21 राउंड काफ़ी हैं। अंत में एक-दो मिनट चुपचाप बैठें।
क्या उद्गीथ गायकों के लिए उपयोगी है?
यह पूरी सांस भरना और स्थिर सुर के साथ लंबी, नियंत्रित सांस छोड़ना सिखाता है, जो गायन की बुनियादी श्वास तकनीकें हैं। यह अच्छा वॉर्म-अप है, स्वर-प्रशिक्षण का विकल्प नहीं।
धीरे-धीरे किए जाने पर श्वास अभ्यास ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित हैं। चक्कर, घबराहट या साँस फूलने पर रुक जाएँ, और अगर आपको हृदय या फेफड़ों का रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मिर्गी है या आप गर्भवती हैं तो पहले डॉक्टर से पूछें।
