1. होम
  2. मुद्राएँ
  3. आकाश मुद्रा (आकाश तत्व की मुद्रा (शुनि मुद्रा))

आकाश मुद्रा: अर्थ, विधि और फायदे

आकाश मुद्रा में मध्यमा उंगली का सिरा अंगूठे के सिरे से मिलता है और बाकी उंगलियाँ खुली रहती हैं। यह धैर्य और शांत होकर सुनने के लिए एक सौम्य ध्यान मुद्रा है।

कैसे करें, चरण-दर-चरण

  1. गद्दी या कुर्सी पर सीधे बैठें, पैर ज़मीन पर सपाट रखें, और हाथों का पिछला भाग घुटनों या जाँघों पर टिकाएँ।
  2. दोनों हाथों में मध्यमा उंगली का सिरा अंगूठे के सिरे पर लाएँ ताकि वे हल्के से छुएँ।
  3. तर्जनी, अनामिका और कनिष्ठा को सीधा पर ढीला रखें, थोड़ा फैलाकर।
  4. आँखें बंद करें, जबड़ा ढीला छोड़ें और नाक से धीरे-धीरे साँस लें, आवाज़ों के आसपास के खालीपन पर ध्यान दें।
  5. 5–15 मिनट तक रहें, फिर उंगलियाँ खोलें, हाथों को हल्के से झटकें और आँखें खोलें।

लाभ

  • परंपरागत रूप से धैर्य और शांत, कम प्रतिक्रियाशील मन के लिए
  • परंपरागत रूप से शांत होकर सुनने और ध्वनि या मौन पर ध्यान के लिए
  • आयुर्वेदिक मुद्रा सिद्धांत में परंपरागत रूप से आकाश तत्व को संतुलित करने के लिए
  • कुंडलिनी योग में (शुनि मुद्रा के रूप में) परंपरागत रूप से स्थिरता और प्रतिबद्धता के लिए

सावधानियाँ

  • आकाश मुद्रा चिकित्सा का विकल्प नहीं है। डॉक्टर की दी दवा लेते रहें और कान, हृदय या ब्लड प्रेशर की समस्या में डॉक्टर को दिखाएँ।
  • अगर मन भटका-सा लगे, चक्कर आए या बेचैनी हो, तो रुकें और पृथ्वी मुद्रा करें या बस हथेलियाँ जाँघों पर रख दें।
  • उंगलियों के जोड़ अकड़े या दुखते हों तो स्पर्श हल्का रखें।

पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

आकाश मुद्रा क्या है?

आकाश मुद्रा एक हस्त मुद्रा है जिसमें मध्यमा का सिरा अंगूठे के सिरे को छूता है और तर्जनी, अनामिका व कनिष्ठा सीधी रहती हैं। यह आकाश तत्व से जुड़ी है और धैर्य व ध्यान के लिए की जाती है।

क्या आकाश मुद्रा और शुनि मुद्रा एक ही हैं?

हाँ, उंगलियों की स्थिति एक ही है। शुनि मुद्रा नाम कुंडलिनी योग में प्रयोग होता है, जहाँ मध्यमा उंगली को धैर्य और अनुशासन से जोड़ा जाता है।

आकाश मुद्रा और शून्य मुद्रा में क्या अंतर है?

आकाश मुद्रा में मध्यमा का सिरा अंगूठे के सिरे को छूता है। शून्य मुद्रा में मध्यमा मुड़कर अंगूठे की जड़ पर आती है और अंगूठा उसे दबाता है। परंपरा कहती है कि पहली आकाश तत्व बढ़ाती है और दूसरी घटाती है।

आकाश मुद्रा कितनी देर रखनी चाहिए?

5 मिनट से शुरू करें और धीरे-धीरे 15 मिनट तक ले जाएँ, दिन में एक या दो बार। चक्कर या बेचैनी लगे तो पहले ही रुक जाएँ।

आकाश मुद्रा के फायदे क्या हैं?

परंपरा में आकाश मुद्रा के फायदे हैं धैर्य, शांत मन और गहरा ध्यान। ये सिद्ध चिकित्सीय प्रभाव नहीं हैं, इसलिए अपना इलाज जारी रखें।

ध्यान में आकाश मुद्रा से क्या अनुभव होता है?

परंपरागत रूप से ध्यान के दौरान धैर्य, शांत होकर सुनने की क्षमता और भीतर खुलेपन का अनुभव बताया जाता है। ये सिद्ध चिकित्सीय प्रभाव नहीं हैं।

क्या आकाश मुद्रा के कोई नुकसान हैं?

कोई हानिकारक नुकसान ज्ञात नहीं है। लंबे समय बैठने पर कुछ लोगों को हल्कापन या सपने जैसा महसूस होता है; समय कम करें या पृथ्वी मुद्रा करें।

मुद्राएँ एकाग्रता और विश्राम की एक पारंपरिक साधना हैं। विशेष स्वास्थ्य प्रभावों पर शोध सीमित है; इन्हें चिकित्सा देखभाल के साथ अपनाएँ, उसकी जगह नहीं।

अपनी भाषा चुनें