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उज्जायी प्राणायाम (सागर श्वास): कैसे करें, फायदे और कब उपयोग करें

उज्जायी नाक से ली जाने वाली धीमी श्वास है, जिसमें गले से दूर की लहरों जैसी हल्की ध्वनि आती है। ऊपर का टाइमर 5 गिनती साँस लेने और 5 छोड़ने की गिनता है, ताकि लय स्थिर रहे।

Seated breathing posture
Ready

Ujjayi timer

Breathe in for 5, breathe out for 5 seconds.

कैसे करें, चरण-दर-चरण

  1. सुखासन या कुर्सी पर सीधे बैठें, या पीठ के बल लेट जाएँ। हाथ घुटनों पर चिन मुद्रा में या पेट पर रखें।
  2. मुँह खोलकर हल्की “हा” ध्वनि के साथ साँस छोड़ें, जैसे शीशे पर भाप बना रहे हों। गले के पिछले हिस्से में हल्का सिकुड़ना महसूस करें।
  3. अब मुँह बंद करें और नाक से साँस छोड़ते हुए वही सिकुड़न बनाए रखें। आपको सागर जैसी धीमी ध्वनि सुनाई देगी।
  4. उसी हल्की ध्वनि के साथ नाक से 5 गिनती तक साँस लें, पहले पेट, फिर पसलियाँ और छाती भरें।
  5. नाक से 5 गिनती तक साँस छोड़ें, ध्वनि शुरू से अंत तक सहज और एकसमान रखें।
  6. गला, जबड़ा और चेहरा ढीला रखें। ध्वनि इतनी हो कि आप सुन सकें, पर कमरे के दूसरे छोर पर बैठा व्यक्ति नहीं।
  7. शुरुआत में 12 चक्र करें (लगभग 2 मिनट), फिर साँस को सामान्य होने दें।

लाभ

  • साँस को लगभग छह साँस प्रति मिनट तक धीमा करता है, जिसे धीमी श्वास पर हुए अध्ययनों में शांत हृदय लय से जोड़ा गया है
  • मन को ध्वनि का सहारा देता है, जिससे आसन और ध्यान में एकाग्रता बढ़ती है
  • सोने से पहले धीरे-धीरे करने पर तनाव कम करने और नींद में मदद कर सकता है
  • प्रवाही योग में लय एकसमान रखने में मदद करता है, ताकि ज़्यादा ज़ोर लगाने पर आपको पता चल जाए

सावधानियाँ

  • गला ढीला रखें; तनाव, गले में खराश या सिरदर्द हो तो रुकें
  • चक्कर या हल्कापन लगे तो रुकें और सामान्य साँस लें
  • साँस रोकने वाला शास्त्रीय रूप हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या गर्भावस्था के लिए नहीं है; टाइमर वाले रूप में साँस नहीं रोकी जाती

पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

उज्जायी प्राणायाम क्या है?

यह नाक से धीमी श्वास है जिसमें गले को हल्का सिकोड़ा जाता है, जिससे सागर जैसी कोमल ध्वनि आती है। इसे योग कक्षाओं में और मन शांत करने वाले प्राणायाम के रूप में उपयोग किया जाता है।

इसे सागर श्वास क्यों कहते हैं?

गले की हल्की ध्वनि समुद्र तट पर आती लहरों जैसी लगती है। इसके संस्कृत नाम उज्जायी का अर्थ है “विजयी”।

उज्जायी प्राणायाम के क्या फायदे हैं?

यह साँस धीमी करता है, एकाग्रता बढ़ाता है, तनाव कम कर सकता है और योग अभ्यास में स्थिर लय बनाए रखता है। धीमी श्वास पर शोध हृदय लय और ब्लड प्रेशर के लिए लाभ की ओर संकेत करता है।

कैसे पता चले कि मैं सही कर रहा हूँ?

साँस लेते और छोड़ते, दोनों समय हल्की, एकसमान ध्वनि सुनाई देती है, गला ढीला महसूस होता है और साँस सामान्य से धीमी होती है। गले में दर्द हो तो आप बहुत ज़्यादा सिकोड़ रहे हैं।

क्या उज्जायी श्वास से वज़न कम होता है?

सीधे तौर पर नहीं। यह प्रवाही योग अभ्यास को देर तक जारी रखने में मदद करती है, और कैलोरी उस गति से खर्च होती है।

क्या उज्जायी के कोई नुकसान हैं?

यह ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित है। गला ज़्यादा सिकोड़ने से गला सूख सकता है या सिरदर्द हो सकता है, और बहुत गहरी साँसों से चक्कर आ सकता है।

क्या उज्जायी लेटकर कर सकते हैं?

हाँ। पीठ के बल लेटकर इसे सीखना और सोने से पहले आराम करना, दोनों अच्छे हैं।

धीरे-धीरे किए जाने पर श्वास अभ्यास ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित हैं। चक्कर, घबराहट या साँस फूलने पर रुक जाएँ, और अगर आपको हृदय या फेफड़ों का रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मिर्गी है या आप गर्भवती हैं तो पहले डॉक्टर से पूछें।

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