ऊर्ध्व पद्मासन (लोटस इन शोल्डर स्टैंड) करने का तरीका, स्टेप बाय स्टेप
- कूल्हे खोलने वाले आसनों से वार्म अप करें, फिर मुड़े कंबल पर सालम्ब सर्वांगासन में आएं, हाथ पीठ को सहारा दें और कूल्हे कंधों के ऊपर हों।
- बायां हाथ पीठ पर रखें। दाहिने हाथ की मदद से दाहिना घुटना मोड़ें और दाहिना पैर बाईं जांघ पर ऊपर की ओर रखें।
- दाहिना हाथ वापस पीठ पर लाएं। बायां घुटना मोड़ें और बाएं पैर को दाहिनी जांघ पर मोड़कर रखें, बाएं हाथ की मदद तभी लें जब घुटना पूरी तरह आरामदायक हो।
- घुटनों को छत की ओर रखें ताकि पद्मासन कूल्हों के ऊपर संतुलित रहे। कोहनियां अंदर और हाथ पीठ पर ऊपर की ओर रखें।
- गर्दन स्थिर, नज़र छाती की ओर और सांस धीमी रखें।
- 2–4 सांस (लगभग 15 सेकंड) तक रुकें।
- एक-एक पैर करके पद्मासन खोलें, दोनों पैरों को सीधा करके सर्वांगासन में आएं, फिर धीरे-धीरे नीचे लुढ़कें। अगली बार दूसरा पैर ऊपर रखकर अभ्यास करें।
फायदे और सावधानियां
फायदे
- जो लोग पहले से पद्मासन में सहज हैं, उनके कूल्हों, घुटनों और टखनों को पद्मासन के मोड़ में खींचता है
- शरीर को कंधों पर सीधा रखने वाली पेट और कंधों की मांसपेशियों पर काम करता है
- सर्वांगासन की तरह गर्दन के पिछले हिस्से और ऊपरी पीठ को खींचता है
- उल्टी स्थिति में संतुलन और शांत एकाग्रता सिखाता है
- सर्वांगासन में पद्मासन के दूसरे रूपों, जैसे पिंडासन, के लिए तैयार करता है
इन स्थितियों में न करें या बदलाव के साथ करें
- घुटने की कोई भी चोट, मेनिस्कस फटना, घुटने की सर्जरी या पद्मासन में दर्द — यह आसन न करें
- गर्दन की चोट, सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस, डिस्क की समस्या या ऑस्टियोपोरोसिस
- हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, ग्लूकोमा या रेटिना का अलग होना
- गर्भावस्था, मिर्गी, माइग्रेन का दौरा, या सर्दी-ज़ुकाम या साइनस का संक्रमण
- भरे पेट न करें; कई लोग पीरियड्स के दौरान उल्टे आसन छोड़ना पसंद करते हैं
- अगर आप दोनों तरफ बिना दर्द के पूर्ण पद्मासन में नहीं बैठ पाते, तो आप अभी इस आसन के लिए तैयार नहीं हैं
पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ऊर्ध्व पद्मासन क्या है?
ऊर्ध्व पद्मासन सर्वांगासन में किया जाने वाला पूर्ण पद्मासन है: वज़न कंधों पर रहता है, हाथ पीठ को सहारा देते हैं और पैर पद्मासन में मुड़े रहते हैं, घुटने ऊपर की ओर।
पद्मासन क्या है?
पद्मासन (लोटस पोज़) बैठकर किया जाने वाला आसन है जिसमें हर पैर विपरीत जांघ पर टिका होता है। यह योग में ध्यान का पारंपरिक आसन है और इस जैसे पद्मासन के रूपों का आधार है।
क्या सर्वांगासन में पद्मासन सुरक्षित है?
सिर्फ उन अनुभवी साधकों के लिए जिनके घुटने पद्मासन में दर्द-रहित हों और गर्दन स्वस्थ हो। घुटने या गर्दन की चोट, हाई ब्लड प्रेशर, ग्लूकोमा, गर्भावस्था या माइग्रेन के दौरान इसे न करें।
ऊर्ध्व पद्मासन कितनी देर करना चाहिए?
लगभग 15 सेकंड, या 2–4 सांस। हर बार अभ्यास में ऊपर रहने वाला पैर बदलें।
अगर पद्मासन बहुत कठिन हो तो इसकी जगह क्या करूं?
सर्वांगासन में एक पैर को अर्ध पद्मासन में मोड़ें, या बस पिंडलियों को क्रॉस कर लें। बैठकर अर्ध पद्मासन और पद्मासन पर काम करते रहें।
पद्मासन के फायदे क्या हैं और ऊर्ध्व पद्मासन इससे कैसे अलग है?
पद्मासन के फायदे: रीढ़ सीधी रहती है, मन शांत होता है और ध्यान व प्राणायाम में स्थिरता आती है। ऊर्ध्व पद्मासन में सर्वांगासन की मेहनत भी जुड़ जाती है, इसलिए यह कहीं ज़्यादा कठिन है।
यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है। अगर आप गर्भवती हैं, कोई बीमारी है या चोट लगी है, तो योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें। दर्द, चक्कर या सांस फूलने पर तुरंत रुक जाएं।








