कूर्मासन (टॉर्टॉइज़ पोज़) करने का तरीका, स्टेप बाय स्टेप
- कुछ आगे झुकने वाले और कूल्हे खोलने वाले आसनों से वार्म-अप करें। मैट पर बैठें और पैरों को कूल्हों से थोड़ा ज़्यादा चौड़ा खोलें, घुटने मुड़े और तलवे ज़मीन पर रखें।
- कूल्हों से आगे झुकें और छाती को घुटनों के बीच लाएं। आगे बढ़ने से पहले पेट जांघों तक पहुंच जाना चाहिए।
- एक-एक करके बाहों को उसी तरफ के घुटने के नीचे सरकाएं, हथेलियां नीचे की ओर, और बाहों को बगल की ओर, थोड़ा कूल्हों की तरफ पीछे फैलाएं।
- धीरे-धीरे एड़ियों को आगे सरकाकर पैरों को थोड़ा सीधा करें। घुटनों का पिछला हिस्सा ऊपरी बाहों पर दबता है और छाती को और नीचे ले आता है।
- छाती को और फिर ठुड्डी या माथे को ज़मीन की ओर जाने दें। गर्दन का पिछला हिस्सा लंबा और सांस धीमी व एक-सी रखें।
- 5–8 सांसों (लगभग 30 सेकंड) तक रुकें। अगर घुटनों के पीछे या पीठ में खिंचाव पहले ही तेज़ है, तो घुटने मोड़कर ही रहें।
- बाहर आने के लिए घुटने मोड़ें, एक-एक करके बाहें निकालें और धीरे-धीरे लुढ़कते हुए ऊपर बैठें। हाथों पर पीछे टिकें और घुटनों को धीरे से दाएं-बाएं हिलाएं।
फायदे और सावधानियां
फायदे
- हैमस्ट्रिंग, भीतरी जांघों, कमर के निचले हिस्से और कंधों के पिछले हिस्से में खिंचाव लाता है
- मुड़ी हुई स्थिति में कूल्हों को खोलता है, जिससे बैठकर किए जाने वाले गहरे आगे झुकने वाले आसनों की तैयारी होती है
- अंदर की ओर सिमटा आकार धीमी सांस और शांत, स्थिर एकाग्रता को बढ़ावा देता है
- पेट पर हल्का दबाव पड़ता है, जिसे परंपरागत रूप से बेहतर पाचन से जोड़ा जाता है
- अष्टांग योग के पूर्ण ‘सुप्त कूर्मासन’ के लिए ज़रूरी लचीलापन बनाता है
इन स्थितियों में न करें या बदलाव के साथ करें
- डिस्क हर्निएशन, साइटिका या कमर में तेज़ दर्द — गहरा गोल झुकाव डिस्क पर भार डालता है; इसे न करें
- हैमस्ट्रिंग या जांघ के जोड़ (ग्रोइन) में चोट, या घुटने के पीछे दर्द
- कंधे या कोहनी की चोट — पैर ऊपरी बाहों पर दबाव डालते हैं
- गर्भावस्था, हाल की पेट की सर्जरी या हर्निया — पेट दबता है
- ऑस्टियोपोरोसिस: भार के साथ गहरे गोल आगे झुकने वाले आसनों से बचें
पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
योग में कूर्मासन क्या है?
कूर्मासन (टॉर्टॉइज़ पोज़) बैठकर किया जाने वाला गहरा आगे झुकने वाला आसन है, जिसमें बाहें घुटनों के नीचे से बगल की ओर फैलती हैं और छाती ज़मीन की ओर झुकती है। इससे हैमस्ट्रिंग, कूल्हों और पीठ में खिंचाव आता है।
कूर्मासन का अर्थ क्या है?
‘कूर्म’ का अर्थ है कछुआ और ‘आसन’ का अर्थ है मुद्रा। हिंदू कथाओं में कूर्म भगवान विष्णु का कछुआ अवतार भी है, और यह आसन कछुए की तरह इंद्रियों को भीतर समेटने के भाव को दर्शाता है।
अर्ध कूर्मासन क्या है?
अर्ध कूर्मासन घुटनों के बल किया जाने वाला आसन है: एड़ियों पर बैठें, माथा नीचे रखते हुए आगे झुकें और हथेलियां मिलाकर बाहों को सामने फैलाएं। यह पूर्ण कूर्मासन से कहीं आसान है।
कूर्मासन में कितनी देर रुकना चाहिए?
लगभग 5–8 सांसें (30 सेकंड) काफी हैं। घुटने मोड़कर और सहारे के साथ किए जाने वाले सौम्य यिन-स्टाइल रूप में कुछ लोग कुछ मिनट तक रुकते हैं।
क्या शुरुआती लोग कूर्मासन कर सकते हैं?
शुरुआती लोगों को पहले पश्चिमोत्तानासन, उपविष्ट कोणासन, बद्ध कोणासन और मालासन से तैयारी करनी चाहिए, और कूर्मासन केवल घुटने अच्छी तरह मोड़कर ही आज़माना चाहिए।
कूर्मासन नाम कैसे पड़ा?
रोज़मर्रा की हिंदी में इसे ‘कछुआ’ कहते हैं और संस्कृत में ‘कूर्म’, इसलिए इस आसन को कूर्मासन या कछुआ आसन कहा जाता है।
कूर्मासन किन्हें नहीं करना चाहिए?
डिस्क की समस्या, साइटिका, कमर में तेज़ दर्द, हैमस्ट्रिंग या कंधे की चोट, हर्निया, ऑस्टियोपोरोसिस हो या गर्भावस्था में, इसे न करें।
यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है। अगर आप गर्भवती हैं, कोई बीमारी है या चोट लगी है, तो योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें। दर्द, चक्कर या सांस फूलने पर तुरंत रुक जाएं।








