ऊर्ध्व धनुरासन (व्हील पोज़) करने का तरीका, स्टेप बाय स्टेप
- पहले सूर्य नमस्कार के कुछ चक्र, लो लंज और दो-तीन सेतु बंधासन से वार्म-अप करें। कभी ठंडे शरीर से शुरू न करें।
- पीठ के बल लेटें, घुटने मोड़ें और तलवे ज़मीन पर कूल्हों जितनी दूरी पर समानांतर रखें, एड़ियां कूल्हों के पास।
- कोहनियां मोड़ें और हथेलियां कानों के पास ज़मीन पर रखें, उंगलियां कंधों की ओर और कोहनियां ऊपर की ओर।
- पैरों पर दबाव डालकर कूल्हों को ब्रिज में उठाएं। फिर हाथों पर दबाव डालकर सिर के ऊपरी हिस्से पर आएं। यहां रुकें और कोहनियों को अंदर की ओर लाएं।
- सांस लेते हुए हाथों और पैरों से बराबर धकेलें और बाहें सीधी करके सिर को ज़मीन से उठाएं। सिर को बाहों के बीच ढीला लटकने दें।
- घुटने और पैर समानांतर रखें और जांघों को हल्का अंदर की ओर घुमाएं। 3–5 सांसों (लगभग 10–20 सेकंड) तक रुकें।
- नीचे आने के लिए ठुड्डी अंदर करें, कोहनियां और घुटने मोड़ें, और धीरे-धीरे पहले कंधों के पिछले हिस्से पर, फिर रीढ़ पर नीचे आएं। घुटनों को छाती से लगाकर या हल्के ट्विस्ट में आराम करें।
फायदे और सावधानियां
फायदे
- छाती, कंधों, पेट और हिप फ्लेक्सर्स को गहराई से स्ट्रेच करता है
- बाहों, कलाइयों, कंधों, पैरों, नितंबों और पीठ की मांसपेशियों को मज़बूत करता है
- दूसरे उन्नत बैकबेंड के लिए कंधों और रीढ़ का लचीलापन बनाता है
- ऊर्जा देने वाला आसन, जिससे कई लोगों को ताज़गी और उत्साह महसूस होता है
- समय के साथ लचीलेपन और ताकत में प्रगति का साफ पैमाना
इन स्थितियों में न करें या बदलाव के साथ करें
- कमर की चोट, डिस्क की समस्या, स्पॉन्डिलोलिस्थेसिस या स्पाइनल स्टेनोसिस — ऊर्ध्व धनुरासन न करें
- गर्भावस्था — बिल्कुल न करें
- हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, ग्लूकोमा या आंख की हाल की सर्जरी, क्योंकि सिर हृदय से नीचे जाता है
- कलाई, कंधे या गर्दन में चोट, या कार्पल टनल सिंड्रोम
- शुरुआती लोगों या ठंडे शरीर के लिए नहीं — केवल अच्छे वार्म-अप के बाद और जब सेतु बंधासन आसान लगे
- कमर में चुभन, चक्कर, या कलाइयों या कंधों में दर्द हो तो तुरंत रुक जाएं
पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ऊर्ध्व धनुरासन के फायदे क्या हैं?
यह छाती, कंधों, पेट और हिप फ्लेक्सर्स को स्ट्रेच करता है और बाहों, पैरों, नितंबों और पीठ को मज़बूत करता है। यह दूसरे उन्नत बैकबेंड के लिए ज़रूरी लचीलापन भी बनाता है।
क्या शुरुआती लोगों के लिए चक्रासन सुरक्षित है?
नहीं। यह उन्नत आसन है। पहले सेतु बंधासन, धनुरासन और उष्ट्रासन से तैयारी करें, फिर ब्लॉक या दीवार का सहारा लें। हमेशा पहले वार्म-अप करें।
चक्रासन में कितनी देर रुकना चाहिए?
3–5 सांसों (लगभग 10–20 सेकंड) तक रुकें, आराम करें, और अच्छा लगे तो दो-तीन बार दोहराएं।
चक्रासन में कमर में दर्द क्यों होता है?
आमतौर पर इसलिए कि पंजे बाहर की ओर मुड़ जाते हैं, घुटने फैल जाते हैं या कंधे जकड़े होते हैं, जिससे सारा मोड़ कमर पर आ जाता है। पैर समानांतर रखें, कंधे खोलने पर काम करें, और तेज़ दर्द हो तो रुक जाएं।
चक्रासन किन्हें नहीं करना चाहिए?
जिन्हें कमर की चोट, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, ग्लूकोमा, या कलाई, कंधे या गर्दन की चोट हो, और गर्भवती महिलाएं।
चक्रासन और ऊर्ध्व धनुरासन में क्या अंतर है?
कोई अंतर नहीं: ये एक ही आसन के दो नाम हैं। चक्रासन का अर्थ है पहिये जैसा आसन और ऊर्ध्व धनुरासन का अर्थ है ऊपर की ओर धनुष जैसा आसन।
चक्रासन नाम का अर्थ क्या है?
"चक्र" का अर्थ है पहिया और "आसन" का अर्थ है मुद्रा। इस आसन में शरीर पहिये जैसा गोल आकार लेता है, इसलिए इसे चक्रासन या व्हील पोज़ कहते हैं।
यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है। अगर आप गर्भवती हैं, कोई बीमारी है या चोट लगी है, तो योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें। दर्द, चक्कर या सांस फूलने पर तुरंत रुक जाएं।








