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Astavakrasana

अष्टवक्रासन (एट एंगल पोज़): एक हुक से बनने वाला आर्म बैलेंस

अष्टवक्रासन में आपका शरीर मुड़ी हुई बाहों पर संतुलित रहता है और दोनों पैर एक तरफ फैले होते हैं। 3D आकृति को सामने से देखें, फिर नीचे कदम-दर-कदम आगे बढ़ें।

  • स्तरविशेषज्ञ
  • कितनी देर रुकें10 s हर तरफ
अष्टवक्रासन (एट-एंगल पोज़)

अष्टवक्रासन (एट-एंगल पोज़) करने का तरीका, स्टेप बाय स्टेप

  1. कूल्हों, हैमस्ट्रिंग, कलाइयों और कोर का वार्म-अप करें। मैट पर पैरों को सामने फैलाकर बैठें।
  2. बायां घुटना मोड़ें और दोनों हाथों से बायां पैर उठाएं। बाईं बांह को घुटने के नीचे से निकालें और घुटने के पिछले हिस्से को जितना ऊंचा हो सके, कंधे के पास बाईं ऊपरी बांह पर फंसाएं।
  3. दोनों हथेलियां कूल्हों के बगल में ज़मीन पर रखें, कंधों जितनी दूरी पर, उंगलियां आगे की ओर।
  4. हाथों से दबाव देकर कूल्हों और दाएं पैर को ज़मीन से उठाएं। दाएं टखने को बाएं टखने के ऊपर क्रॉस करें।
  5. कोहनियों को 90° की ओर मोड़ें और छाती को आगे और नीचे झुकाएं। साथ ही जांघों को बाईं बांह के चारों ओर कसें और दोनों पैरों को बाईं ओर फैलाएं।
  6. 2–5 सांसों (लगभग 10 सेकंड) तक रुकें। सामने या थोड़ा नीचे देखें और कोहनियों को अंदर की ओर कसा रखें।
  7. बाहर आने के लिए घुटने मोड़ें, छाती उठाएं, कूल्हे ज़मीन पर लाएं और टखने अलग करें। आराम करें, फिर दूसरी तरफ दोहराएं।

फायदे और सावधानियां

फायदे

  • कलाइयों, बाहों, छाती और कंधों को मज़बूत करता है
  • ऑब्लीक और गहरी कोर मांसपेशियों को मज़बूत बनाता है
  • कूल्हों और हैमस्ट्रिंग में खिंचाव लाता है और हल्का ट्विस्ट जोड़ता है
  • संतुलन, तालमेल और एकाग्रता बढ़ाता है
  • लीवरेज सिखाता है: साफ समझ आता है कि कच्ची ताकत से ज़्यादा तकनीक मायने रखती है

इन स्थितियों में न करें या बदलाव के साथ करें

  • कलाई, कोहनी या कंधे की चोट, जिसमें कार्पल टनल सिंड्रोम और फ्रोज़न शोल्डर शामिल हैं
  • हैमस्ट्रिंग या जांघ के जोड़ (ग्रोइन) में खिंचाव, या पैर को बांह पर फंसाते समय कूल्हे में दर्द
  • गर्भावस्था, हाल की पेट की सर्जरी या हर्निया
  • ट्विस्ट या भार के साथ आगे झुकने से बढ़ने वाला पीठ दर्द — इसे न करें और फिज़ियोथेरेपिस्ट से पूछें
  • शुरुआती आसन नहीं: पहले बकासन, चतुरंग और पार्श्व बकासन सीखें

पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

योग में अष्टवक्रासन क्या है?

अष्टवक्रासन (एट एंगल पोज़) एक आर्म बैलेंस है जिसमें एक पैर ऊपरी बांह पर फंसा होता है, टखने क्रॉस होते हैं, और दोनों पैर बगल में फैले रहते हैं जबकि छाती मुड़ी बाहों पर आगे झुकती है।

इसे अष्टवक्रासन क्यों कहते हैं?

इसका नाम ऋषि अष्टावक्र के नाम पर है, जिनके नाम का अर्थ है ‘आठ जगह से टेढ़ा’। ‘अष्ट’ का अर्थ है आठ और ‘वक्र’ का अर्थ है टेढ़ा।

अष्टवक्रासन में कैसे आएं?

बैठें, एक पैर को उसी तरफ की ऊपरी बांह पर ऊंचा फंसाएं, हाथ कूल्हों के बगल में रखें और ऊपर उठें। दूसरे टखने को ऊपर क्रॉस करें, फिर कोहनियां मोड़ें, आगे झुकें और पैरों को बगल में फैलाएं।

क्या अष्टवक्रासन, पार्श्व बकासन से कठिन है?

ज़्यादातर लोगों को यह एक कदम कठिन लगता है, क्योंकि इसमें बाहों की ताकत के साथ खुली हैमस्ट्रिंग और कूल्हे भी चाहिए। पहले पार्श्व बकासन सीखें; दोनों में मुड़ी बांह का एक-सा ‘शेल्फ’ होता है।

अगर कूल्हे न उठें तो क्या करें?

ज़्यादा ऊंचाई के लिए हर हाथ के नीचे एक ब्लॉक रखें, घुटने मोड़े रखें, और टखने क्रॉस करने से पहले एक पैर फंसाकर उठने का अभ्यास करें (एलिफेंट्स ट्रंक पोज़, यानी एक हस्त भुजासन)।

अष्टवक्रासन के फायदे क्या हैं?

यह कलाइयों, बाहों, छाती, कंधों और ऑब्लीक मांसपेशियों को मज़बूत करता है, हैमस्ट्रिंग और कूल्हों में खिंचाव लाता है, और संतुलन व एकाग्रता बढ़ाता है।

अष्टवक्रासन किन्हें नहीं करना चाहिए?

कलाई, कोहनी या कंधे की चोट, हैमस्ट्रिंग या कूल्हे में खिंचाव, ट्विस्ट से बढ़ने वाला पीठ दर्द हो, गर्भावस्था में, या पेट की सर्जरी के बाद इसे न करें।

यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है। अगर आप गर्भवती हैं, कोई बीमारी है या चोट लगी है, तो योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें। दर्द, चक्कर या सांस फूलने पर तुरंत रुक जाएं।

Eight-Angle Pose
घुमाने के लिए खींचें · रीसेट के लिए दो बार टैप करें
अष्टवक्रासन (एट-एंगल पोज़) का अभ्यासआसन: 1
चलाएँ दबाइए। गाइड हर आसन 3D में दिखाता है और बोलकर समझाता है। आकृति को उँगली या माउस से घुमाइए।
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