भुजपीड़ासन (शोल्डर-प्रेसिंग पोज़) करने का तरीका, स्टेप बाय स्टेप
- कूल्हों, हैमस्ट्रिंग और कलाइयों का वार्म-अप करें। पैरों को कूल्हों से थोड़ा ज़्यादा चौड़ा रखकर खड़े हों, आगे झुकें और घुटनों को गहराई से मोड़ें।
- बाहों को पैरों के बीच से निकालें और कंधों को जितना हो सके घुटनों के पीछे ले जाएं। हथेलियां एड़ियों के ठीक पीछे ज़मीन पर सपाट रखें, कंधों जितनी दूरी पर, उंगलियां आगे की ओर।
- कोहनियां हल्की मोड़ें और कूल्हे नीचे लाएं ताकि जांघों का पिछला हिस्सा ऊपरी बाहों पर, कंधों के जितना पास हो सके, ऊंचा टिके।
- जांघों को बाहों के चारों ओर मज़बूती से कसें, वज़न पीछे हाथों पर लाएं और पैरों को ज़मीन से उठाएं।
- एक टखने को दूसरे के ऊपर क्रॉस करें और पैरों को अंदर की ओर कसें। सामने देखें और छाती उठी हुई रखें।
- 3–5 सांसों (लगभग 10 सेकंड) तक रुकें, सांस धीमी रखें।
- बाहर आने के लिए टखने अलग करें, पैर ज़मीन पर लाएं और धीरे-धीरे खड़े हो जाएं। दूसरे टखने को ऊपर रखकर दोहराएं।
फायदे और सावधानियां
फायदे
- कलाइयों, अग्रबाहुओं, बाहों और कंधों को मज़बूत करता है
- कोर की ताकत बनाता है, खासकर पेट की गहरी मांसपेशियों और हिप फ्लेक्सर्स की
- हैमस्ट्रिंग, भीतरी जांघों और कमर के निचले हिस्से में खिंचाव लाता है
- संतुलन बढ़ाता है और आर्म बैलेंस में लीवरेज का इस्तेमाल सिखाता है
- कूर्मासन, टिटिभासन और दूसरे एडवांस्ड आर्म बैलेंस के लिए तैयार करता है
इन स्थितियों में न करें या बदलाव के साथ करें
- कलाई, कोहनी या कंधे की चोट, जिसमें कार्पल टनल सिंड्रोम और फ्रोज़न शोल्डर शामिल हैं
- कमर दर्द या डिस्क की समस्या जो गोल आगे झुकने से बढ़ती हो
- हैमस्ट्रिंग या जांघ के जोड़ (ग्रोइन) में खिंचाव
- गर्भावस्था, हाल की पेट की सर्जरी या हर्निया
- सीखते समय नितंबों के नीचे कुशन रखें, ताकि पीछे ज़मीन पर बैठ जाएं तो चोट न लगे
पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भुजपीड़ासन का अर्थ क्या है?
‘भुज’ का अर्थ है बांह या कंधा, ‘पीड़ा’ का अर्थ है दबाव और ‘आसन’ का अर्थ है मुद्रा, यानी बांह या कंधे पर दबाव वाला आसन। इसमें जांघों का पिछला हिस्सा ऊपरी बाहों पर दबता है।
क्या भुजपीड़ासन, बकासन से आसान है?
कई लोगों को इसमें संतुलन आसान लगता है, क्योंकि आप आगे झुकने के बजाय हाथों के ऊपर पीछे बैठते हैं। लेकिन पैरों को बाहों पर ऊंचा लाने के लिए इसमें हैमस्ट्रिंग और कूल्हों का ज़्यादा लचीलापन चाहिए।
भुजपीड़ासन में पैर ज़मीन से कैसे उठाएं?
कंधों को घुटनों के और पीछे ले जाएं, जांघों को बाहों में कसें और वज़न पीछे लाएं। शुरुआत में पैरों को ब्लॉक पर रखने से बहुत मदद मिलती है।
भुजपीड़ासन के फायदे क्या हैं?
यह कलाइयों, बाहों, कंधों और कोर को मज़बूत करता है, हैमस्ट्रिंग और भीतरी जांघों में खिंचाव लाता है, और संतुलन बढ़ाता है। यह कूर्मासन और टिटिभासन के लिए भी तैयार करता है।
अष्टांग प्राइमरी सीरीज़ में भुजपीड़ासन कहां आता है?
यह नावासन के बाद और कूर्मासन से पहले आता है।
क्या कंधे के दर्द में भुजपीड़ासन अच्छा है?
नहीं। यह कंधों और कलाइयों पर वज़न डालता है। कंधे के दर्द या जकड़न के लिए गोमुखासन जैसे हल्के स्ट्रेच आज़माएं, और दर्द बना रहे तो फिज़ियोथेरेपिस्ट से पूछें।
भुजपीड़ासन किन्हें नहीं करना चाहिए?
कलाई, कोहनी या कंधे की चोट, कमर या डिस्क की समस्या, हैमस्ट्रिंग में खिंचाव हो, गर्भावस्था में या पेट की सर्जरी के बाद इसे न करें।
यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है। अगर आप गर्भवती हैं, कोई बीमारी है या चोट लगी है, तो योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें। दर्द, चक्कर या सांस फूलने पर तुरंत रुक जाएं।








