कैसे करें, चरण-दर-चरण
- आराम से बैठें, आँखें बंद करें और चाहें तो एक हाथ हृदय पर रखें।
- किसी ऐसे व्यक्ति को याद करें जिनसे आप सहज प्रेम करते हैं, और सरल वाक्यों में मन ही मन उनका भला चाहें।
- वही वाक्य स्वयं की ओर मोड़ें: मैं सुरक्षित रहूँ, मैं प्रसन्न रहूँ, मैं स्वस्थ रहूँ, मैं सहजता से जिऊँ।
- इन्हें किसी तटस्थ व्यक्ति को अर्पित करें, जिसे आप देखते हैं पर ठीक से जानते नहीं।
- अगर तैयार महसूस करें, तो इन्हें किसी ऐसे व्यक्ति को अर्पित करें जो आपको कठिन लगता है।
- अंत में शुभकामनाओं को हर जगह के सभी प्राणियों तक फैलाएँ, और उस भाव में विश्राम करें।
लाभ
- अध्ययन बताते हैं कि यह सकारात्मक भावनाएँ और सामाजिक जुड़ाव का एहसास बढ़ा सकता है
- नियमित अभ्यास से आत्म-आलोचना कम हो सकती है
- कुछ शोध इसे कम तनाव और दूसरों के प्रति अधिक करुणा से जोड़ते हैं
- योग सूत्र भी मन को शांत करने के लिए मैत्री भाव की सलाह देते हैं
सावधानियाँ
- कुछ लोगों को शुरुआत में स्वयं के प्रति दया कठिन लगती है, और तीव्र भावनाएँ उभर सकती हैं। किसी सहज प्रिय व्यक्ति से शुरू करें, धीरे चलें, और अगर पुराना दुख या चोट भारी लगे तो सहायता लें।
पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मेत्ता ध्यान क्या है?
मेत्ता ध्यान, या मेत्ता भावना, बौद्ध अभ्यास है जिसमें स्वयं और दूसरों के लिए मन ही मन शुभकामनाएँ दोहराकर मित्रता का भाव विकसित किया जाता है। मेत्ता का अर्थ है मित्रता और भावना का अर्थ है विकास। योग में इसी गुण को मैत्री कहते हैं, और मैत्री ध्यान भी इन्हीं चरणों का पालन करता है। संबंधित अभ्यासों के लिए हमारे सभी निर्देशित ध्यान देखें।
मेत्ता और मैत्री में क्या अंतर है?
अर्थ में कोई अंतर नहीं है। मेत्ता पाली शब्द है जो बौद्ध परंपरा में चलता है, और मैत्री उसी का संस्कृत रूप है जो योग सूत्र में आता है। पाली में "त्त" दोहरा त है, जिसे थोड़ा रुककर बोलते हैं: "मेत्-ता भा-व-ना"।
मैत्री ध्यान के चार वाक्य कौन-से हैं?
सबसे आम हैं: आप सुरक्षित रहें, आप प्रसन्न रहें, आप स्वस्थ रहें, आप सहजता से जिएँ। आप इन्हें ऐसे शब्दों में बदल सकते हैं जो आपको सच्चे लगें, और "आप" की जगह "मैं" या "सभी प्राणी" कह सकते हैं।
क्या मैत्री ध्यान काम करता है?
शोध बताते हैं कि यह कई लोगों में सकारात्मक भावनाएँ, जुड़ाव का एहसास और आत्म-करुणा बढ़ा सकता है, खासकर कई हफ़्तों के नियमित अभ्यास से। असर अलग-अलग होता है, और कई अध्ययन छोटे हैं, इसलिए इसे इलाज नहीं बल्कि एक सहायक कौशल मानें।
अगर अभ्यास के दौरान कोई प्रेम महसूस न हो तो?
यह बहुत आम है। किसी भावना का इंतज़ार किए बिना वाक्यों को सच्चे संकल्प के रूप में दोहराते रहें। आत्मीयता अक्सर धीरे-धीरे बढ़ती है, कभी-कभी दिनों या हफ़्तों बाद, और यह पहले ध्यान के आसन पर नहीं, रोज़ के जीवन में दिख सकती है।
शुरुआती व्यक्ति को मैत्री ध्यान कितनी देर करना चाहिए?
रोज़ 5 से 10 मिनट से शुरू करें। काम से पहले 5 मिनट का मैत्री ध्यान शुरुआत के लिए काफ़ी है; तैयार होने पर पूरे 12 मिनट के निर्देशित सत्र पर जाएँ।
क्या मैत्री ध्यान धार्मिक है?
यह बौद्ध और योग परंपराओं से आता है, पर विधि बस ध्यान के साथ शुभकामनाएँ दोहराना है। किसी भी धर्म के या बिना धर्म के लोग इसका अभ्यास करते हैं, और कुछ लोग इन वाक्यों की जगह अपनी परंपरा की कोई प्रार्थना इस्तेमाल करते हैं।
ध्यान सेहत में सहायक है; यह चिकित्सा या मनोवैज्ञानिक देखभाल की जगह नहीं लेता। अगर ध्यान के दौरान परेशान करने वाली भावनाएँ उठें, तो रुकें, आँखें खोलें और खुद को स्थिर करें।
