कैसे करें, चरण-दर-चरण
- पीठ के बल लेटें, सिर के नीचे मोड़ा हुआ कंबल रखें, घुटने मोड़ें या पैर सीधे रखें, बाहें शरीर के पास ढीली छोड़ दें। (अभ्यास आसान लगने लगे तो सीधे बैठकर भी कर सकते हैं।)
- कुछ सामान्य सांसें लें, फिर धीरे से पूरी सांस बाहर छोड़ दें।
- विलोम 1 (रुक-रुककर सांस लेना): जब घेरा बढ़ने लगे, लगभग 2 सेकंड सांस लें, थोड़ा रुकें, 2 सेकंड और लें, रुकें, फिर आख़िरी तिहाई भरें — 6 सेकंड की सांस में तीन छोटे कदम।
- जब घेरा सिकुड़े, नाक से 6 सेकंड तक एक धीमी, सहज और लगातार धारा में सांस छोड़ें।
- टाइमर के 9 राउंड दोहराएं (2 मिनट से थोड़ा कम)। हर विराम कोमल रखें — गला खुला और चेहरा ढीला रहे।
- कुछ दिनों में पहला चरण आसान लगने लगे तो विलोम 2 आज़माएं: 6 सेकंड की सहज सांस लें और छोटे विरामों के साथ तीन छोटे कदमों में छोड़ें।
- एक मिनट सामान्य सांस लें और उठने से पहले शवासन में थोड़ा आराम करें।
लाभ
- सांस पर बारीक नियंत्रण सिखाता है और फेफड़ों व पसलियों के प्रति जागरूकता बढ़ाता है
- रुक-रुककर सांस छोड़ना (विलोम 2) परंपरागत रूप से मन को शांत और स्थिर करने के लिए किया जाता है
- रुक-रुककर सांस लेना (विलोम 1) परंपरागत रूप से ताज़गी और स्फूर्ति महसूस करने के लिए किया जाता है
- धीमी गति (एक मिनट में 5 सांसें) विश्राम और तनाव कम करने में मदद करती है
- साधारण धीमी सांस और कुंभक वाले उन्नत अभ्यासों के बीच एक सहज सीढ़ी
सावधानियाँ
- विराम छोटे और आरामदायक रखें; “और हवा भरने” के लिए कभी ज़ोर न लगाएं
- हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर या हाल की सर्जरी में लेटकर अभ्यास करें और विराम बहुत हल्के रखें — पहले डॉक्टर से पूछें
- अस्थमा या COPD में जकड़न या सांस फूलने पर रुक जाएं, और केवल पहला चरण या साधारण धीमी सांस करें
- चक्कर, घबराहट या सिर हल्का लगे तो सामान्य सांस पर लौटें और आराम करें
पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
विलोम प्राणायाम क्या है?
विलोम रुक-रुककर सांस लेने का अभ्यास है: आप छोटे-छोटे कदमों में, छोटे विरामों के साथ सांस लेते या छोड़ते हैं। संस्कृत में इसका अर्थ है “धारा के विपरीत”।
विलोम प्राणायाम चरण-दर-चरण कैसे करें?
पीठ के बल लेटें। लगभग 2 सेकंड सांस लें, रुकें, फिर लें, रुकें, फिर फेफड़े भरें, और एक धारा में धीरे-धीरे सांस छोड़ें। यह विलोम 1 है। 9 बार दोहराएं।
विलोम 1 और विलोम 2 में क्या अंतर है?
विलोम 1 में सांस लेना रुक-रुककर होता है और यह स्फूर्ति देता है। विलोम 2 में सांस छोड़ना रुक-रुककर होता है और यह शांत करता है। विलोम 3 में दोनों रुक-रुककर होते हैं।
क्या विलोम और अनुलोम-विलोम एक ही हैं?
नहीं। विलोम दोनों नथुनों से रुक-रुककर सांस लेना है। अनुलोम-विलोम नाड़ी शोधन है, जिसमें उंगलियों से नथुने बदले जाते हैं।
विलोम प्राणायाम किसे नहीं करना चाहिए?
हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, फेफड़ों की बीमारी या हाल की सर्जरी हो तो विराम बहुत हल्के रखें या पहले डॉक्टर से पूछें। चक्कर या घबराहट हो तो रुक जाएं।
विलोम कितनी देर करना चाहिए?
लगभग 2 मिनट से शुरू करें और धीरे-धीरे 5–10 मिनट तक बढ़ाएं। हमेशा अंत में लेटकर थोड़ा आराम करें।
क्या शुरुआती लोग विलोम कर सकते हैं?
हां। लेटकर, छोटे आरामदायक विरामों के साथ और बिना कुंभक के यह शुरुआती लोगों के लिए उपयुक्त है। पहले चरण से शुरू करें।
धीरे-धीरे किए जाने पर श्वास अभ्यास ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित हैं। चक्कर, घबराहट या साँस फूलने पर रुक जाएँ, और अगर आपको हृदय या फेफड़ों का रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मिर्गी है या आप गर्भवती हैं तो पहले डॉक्टर से पूछें।
