कैसे करें, चरण-दर-चरण
- घुटने मोड़कर और तलवे ज़मीन पर रखकर पीठ के बल लेटें, या पीठ टिकाकर कुर्सी पर बैठें। कंधे ढीले करें।
- एक हाथ ऊपरी छाती पर और दूसरा पेट पर, पसलियों के ठीक नीचे रखें।
- नाक से 4 गिनती तक सांस लें। पेट को हाथ के नीचे उठने दें, जबकि छाती वाला हाथ लगभग स्थिर रहे।
- नाक से या हल्के सिकोड़े होंठों से 6 गिनती तक धीरे सांस छोड़ें। पेट को वापस रीढ़ की ओर बैठता महसूस करें।
- सांस शांत और ढीली रखें। पेट को ज़ोर से बाहर न धकेलें या अंदर न खींचें; उसे अपने आप हिलने दें।
- टाइमर के 10 राउंड (2 मिनट से कम) दोहराएं, फिर सामान्य सांस लें और देखें कि कैसा महसूस हो रहा है।
लाभ
- डायाफ्राम, यानी सांस की मुख्य मांसपेशी, को अपना काम करने देता है, ताकि गर्दन और कंधे ढीले हो सकें
- लंबा सांस छोड़ना सांस और धड़कन को धीमा करता है और तनाव व चिंता की भावना कम कर सकता है
- डॉक्टर और फिज़ियोथेरेपिस्ट इसे एसिड रिफ्लक्स, रूमिनेशन सिंड्रोम और कुछ सांस की समस्याओं के इलाज के हिस्से के रूप में इस्तेमाल करते हैं
- बच्चों, बुज़ुर्गों और बिल्कुल नए लोगों के लिए भी काफ़ी आसान
- लगभग हर यौगिक प्राणायाम और गायन व खेल में सांस नियंत्रण की नींव
सावधानियाँ
- पेट की सर्जरी या सी-सेक्शन के बाद तभी शुरू करें जब डॉक्टर या फिज़ियोथेरेपिस्ट सहमत हों, और पेट की हलचल कोमल रखें
- गर्भावस्था में हलचल कोमल रखें और बाद के महीनों में बैठकर या करवट लेकर अभ्यास करें
- चक्कर या झनझनाहट लगे तो आप ज़रूरत से ज़्यादा हवा ले रहे हैं; और हल्की सांस लें और कुछ देर सामान्य सांस पर लौटें
- डायाफ्रामिक ब्रीदिंग आपके इनहेलर या डॉक्टर के बताए इलाज की जगह नहीं लेती
पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
डायाफ्रामिक ब्रीदिंग क्या है?
यह मुख्य रूप से डायाफ्राम से सांस लेना है, ताकि सांस लेते समय पेट उठे और छोड़ते समय बैठे, जबकि छाती लगभग स्थिर रहे।
डायाफ्रामिक ब्रीदिंग कितनी देर करनी चाहिए?
दिन में एक या दो बार 5 मिनट से शुरू करें। इस पेज का टाइमर 4 सेकंड सांस लेने और 6 सेकंड छोड़ने के 10 राउंड चलाता है; आसान होने पर राउंड बढ़ाएं।
डायाफ्रामिक ब्रीदिंग तनाव कैसे कम करती है?
लंबे सांस छोड़ने वाली धीमी सांस धड़कन को धीमा करती है और शरीर की विश्राम प्रतिक्रिया को सहारा देती है, जो वेगस नर्व से जुड़ी है।
क्या डायाफ्रामिक ब्रीदिंग एसिड रिफ्लक्स में फ़ायदेमंद है?
छोटे अध्ययन बताते हैं कि नियमित अभ्यास से रिफ्लक्स के लक्षण कम हो सकते हैं। इसे डॉक्टर के इलाज के साथ करें, उसकी जगह नहीं।
पेट से सांस लेते समय चक्कर क्यों आता है?
शायद आप बहुत गहरी या बहुत तेज़ सांस ले रहे हैं। छोटी, हल्की सांसें लें और आराम करें।
क्या बच्चे पेट से सांस ले सकते हैं?
हां। पेट पर कोई खिलौना रखकर इसे खेल बना दें, और बस कुछ सांसों तक ही करें।
क्या डायाफ्रामिक ब्रीदिंग और पेट से सांस लेना एक ही है?
हां। ये एक ही तकनीक के दो नाम हैं।
धीरे-धीरे किए जाने पर श्वास अभ्यास ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित हैं। चक्कर, घबराहट या साँस फूलने पर रुक जाएँ, और अगर आपको हृदय या फेफड़ों का रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मिर्गी है या आप गर्भवती हैं तो पहले डॉक्टर से पूछें।
