कैसे करें, चरण-दर-चरण
- खाली पेट सुखासन, वज्रासन या पद्मासन में बैठें। रीढ़ सीधी और सिर सीधा रखें।
- हाथ घुटनों पर ज्ञान मुद्रा में रखें, या बाँहों वाले रूप में कंधों के पास ढीली मुट्ठियाँ बनाएँ।
- कुछ धीमी साँसें लें। फिर नाक से ज़ोर से साँस अंदर लें, पेट और छाती को फैलने दें।
- उतनी ही ज़ोर से नाक से साँस बाहर छोड़ें और पेट अंदर खींचें। पूरक और रेचक का ज़ोर और लंबाई बराबर हो।
- टाइमर की हर गिनती पर लगभग एक पूरी साँस की स्थिर लय रखें: शुरुआत में हर चक्र में 20 साँसें। केवल साँस चले; कंधे और चेहरा ढीले रहें।
- आखिरी साँस के बाद 20 सेकंड के आराम में नाक से धीमी साँस लें, जब तक साँस फिर शांत न हो जाए।
- 3 चक्र करें, फिर शांत बैठें या कुछ मिनट अनुलोम विलोम करें।
लाभ
- शरीर में गर्मी और ऊर्जा लाता है; सुबह जागने का अच्छा तरीका
- डायाफ्राम और श्वास की मांसपेशियों को प्रशिक्षित करता है; योग श्वास पर छोटे अध्ययन फेफड़ों की बेहतर कार्यक्षमता बताते हैं
- सर्दी-ज़ुकाम में बंद नाक खोलने में मदद कर सकता है
- अभ्यास के बाद कुछ समय तक सतर्कता और एकाग्रता तेज़ होती है
सावधानियाँ
- हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, स्ट्रोक का इतिहास, मिर्गी या ग्लूकोमा में अभ्यास न करें
- गर्भावस्था में, हर्निया में, या पेट, छाती, आँख या कान की हाल की सर्जरी के बाद न करें
- पैनिक अटैक या बेचैनी हो तो न करें; तेज़ साँस से घबराहट शुरू हो सकती है
- चक्कर, हाथों में झनझनाहट, सीने में दर्द या सिरदर्द हो तो तुरंत रुकें
- केवल खाली पेट करें: भोजन के बाद 3–4 घंटे रुकें
पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
भस्त्रिका प्राणायाम क्या है?
यह धौंकनी श्वास है: स्थिर लय में नाक से ज़ोरदार और बराबर साँस लेना और छोड़ना। यह शरीर को गर्म करता है और ऊर्जा देता है।
भस्त्रिका प्राणायाम कितनी बार करना चाहिए?
शुरुआती लोग 10–20 साँसों के 2–3 चक्र कर सकते हैं, हर चक्र के बाद आराम के साथ। दिन में एक बार, सुबह, काफ़ी है।
भस्त्रिका और कपालभाति में क्या अंतर है?
भस्त्रिका में पूरक और रेचक दोनों ज़ोरदार होते हैं। कपालभाति में केवल रेचक सक्रिय होता है और पूरक अपने-आप होता है।
क्या हाई ब्लड प्रेशर में भस्त्रिका सुरक्षित है?
नहीं। हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग वाले लोगों को इससे बचना चाहिए। भ्रामरी या अनुलोम विलोम जैसी धीमी श्वास ज़्यादा सुरक्षित विकल्प है।
क्या खाना खाने के बाद भस्त्रिका कर सकते हैं?
नहीं। भोजन के बाद 3–4 घंटे रुकें। भरे पेट पर पेट की तेज़ हलचल असहज लगती है और रिफ्लक्स हो सकता है।
भस्त्रिका के नुकसान क्या हैं?
चक्कर, झनझनाहट, सिरदर्द या बेचैनी, जो आमतौर पर बहुत तेज़ या बहुत देर करने से होते हैं। गति धीमी करें, आराम करें और कम चक्र करें।
क्या गर्भावस्था में भस्त्रिका सुरक्षित है?
नहीं। गर्भावस्था में तेज़ और ज़ोरदार श्वास से बचें। धीमी, सौम्य श्वास बेहतर विकल्प है; अपनी दाई या डॉक्टर से पूछें।
भस्त्रिका प्राणायाम के मुख्य फायदे क्या हैं?
यह शरीर को ऊर्जा देता है, गर्माहट लाता है और श्वास की मांसपेशियों को मज़बूत करता है। हाई BP, हृदय रोग, मिर्गी या गर्भावस्था में यह उपयुक्त नहीं है।
धीरे-धीरे किए जाने पर श्वास अभ्यास ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित हैं। चक्कर, घबराहट या साँस फूलने पर रुक जाएँ, और अगर आपको हृदय या फेफड़ों का रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मिर्गी है या आप गर्भवती हैं तो पहले डॉक्टर से पूछें।
