कैसे करें, चरण-दर-चरण
- खाली पेट सुखासन या वज्रासन में सीधे बैठें। रीढ़ सीधी और कंधे ढीले रखें।
- हथेलियाँ ऊपर की ओर करके हाथ घुटनों पर चिन या ज्ञान मुद्रा में रखें (अंगूठे और तर्जनी के सिरे मिले हुए)।
- एक सामान्य साँस लें। फिर पेट को झटके से रीढ़ की ओर खींचते हुए नाक से तेज़ी से साँस बाहर फेंकें।
- पेट को ढीला छोड़ दें ताकि साँस अपने-आप अंदर आए। हवा खींचें नहीं; केवल रेचक सक्रिय है।
- लगभग एक सेकंड में एक रेचक की गति से दोहराएँ और टाइमर की Pump गिनती का पालन करें: पहले चक्रों में 20–30 स्ट्रोक।
- आखिरी स्ट्रोक के बाद 20 सेकंड के आराम में धीमी, सामान्य साँस लें। साँस स्थिर होने तक रुकें।
- 3 चक्र करें। अंत में कुछ मिनट अनुलोम विलोम करें या शांत बैठें।
लाभ
- ताज़गी और ऊर्जा देता है, इसलिए बहुत लोग इसे सुबह करते हैं
- पेट की मांसपेशियों और डायाफ्राम को एक लय में काम करना सिखाता है
- धीमे प्राणायाम से पहले अक्सर बंद नाक खोलने में मदद करता है
- डायबिटीज़ और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के योग कार्यक्रमों में पूरी दिनचर्या के एक हिस्से के रूप में उपयोग होता है
- एकाग्रता बढ़ाता है: गिनती करनी होती है और लय स्थिर रखनी होती है
सावधानियाँ
- हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, स्ट्रोक का इतिहास, मिर्गी या ग्लूकोमा में अभ्यास न करें
- गर्भावस्था में, पेट या आँख की हाल की सर्जरी के बाद, या हर्निया, स्लिप डिस्क या पेट के अल्सर में न करें; कई शिक्षक मासिक धर्म के दौरान भी इसे न करने की सलाह देते हैं
- एसिड रिफ्लक्स (GERD) में न करें, अगर झटकों से तकलीफ़ बढ़ती हो
- केवल खाली पेट करें: भोजन के बाद 3–4 घंटे रुकें
- चक्कर, सिरदर्द, सीने में दर्द या झनझनाहट हो तो तुरंत रुक जाएँ
पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कपालभाति क्या है और इसके क्या फायदे हैं?
यह श्वास की एक तकनीक है जिसमें नाक से छोटे, ज़ोरदार रेचक और अपने-आप होने वाले पूरक होते हैं। यह ऊर्जा देती है, पेट की मांसपेशियों को मज़बूत करती है और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के योग कार्यक्रमों में उपयोग होती है।
कपालभाति कितने मिनट करना चाहिए?
शुरुआती लोग 20–30 स्ट्रोक के 2–3 चक्र कर सकते हैं, यानी लगभग 2–3 मिनट। अनुभवी साधकों को भी शायद ही 5–10 मिनट से ज़्यादा की ज़रूरत होती है।
क्या कपालभाति से पेट की चर्बी कम होती है?
सीधे तौर पर नहीं। कोई भी श्वास अभ्यास शरीर के किसी एक हिस्से की चर्बी नहीं घटाता। यह खानपान और व्यायाम वाली दिनचर्या का हिस्सा हो सकता है, और वही पेट की चर्बी कम करते हैं।
क्या BP के मरीज़ों के लिए कपालभाति सुरक्षित है?
नहीं। हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग वाले लोगों को इससे बचना चाहिए और इसके बजाय अनुलोम विलोम या भ्रामरी जैसी धीमी श्वास चुननी चाहिए।
कपालभाति और भस्त्रिका में क्या अंतर है?
कपालभाति में केवल रेचक सक्रिय होता है और पूरक अपने-आप होता है। भस्त्रिका में पूरक और रेचक दोनों ज़ोरदार और सक्रिय होते हैं।
कपालभाति करने का सबसे अच्छा समय क्या है?
सुबह खाली पेट। भोजन के बाद 3–4 घंटे रुकें, और देर रात न करें क्योंकि यह ऊर्जा बढ़ाता है।
कपालभाति के नुकसान क्या हैं?
बहुत तेज़ या बहुत देर करने से चक्कर, सिरदर्द, मुँह सूखना या पेट में दर्द हो सकता है। रुकें, सामान्य साँस लें और अगली बार कम चक्र करें।
कपालभाति करने से शरीर में क्या बदलाव आते हैं?
यह शरीर को ऊर्जा देता है और पेट की मांसपेशियों को सक्रिय करता है। यह किसी बीमारी का इलाज नहीं है और हर किसी के लिए उपयुक्त भी नहीं; पहले सावधानियाँ पढ़ें।
धीरे-धीरे किए जाने पर श्वास अभ्यास ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित हैं। चक्कर, घबराहट या साँस फूलने पर रुक जाएँ, और अगर आपको हृदय या फेफड़ों का रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मिर्गी है या आप गर्भवती हैं तो पहले डॉक्टर से पूछें।
