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मूर्छा प्राणायाम (बेहोशी जैसी सांस): अर्थ, जोखिम और सांस शांत करने के सुरक्षित तरीके

मूर्छा एक उन्नत कुंभक है जिसका लक्ष्य हल्की, बेहोशी जैसी अवस्था है, इसलिए इसमें सचमुच बेहोश होने का जोखिम है। इसे केवल अनुभवी शिक्षक के साथ सीखें; ऊपर का टाइमर गति के लिए है, सीखने के लिए नहीं।

Seated breathing posture
Ready

Murchha timer

Breathe in for 6, hold for 10, breathe out for 8 seconds.

कैसे करें, चरण-दर-चरण

  1. मूर्छा तभी करें जब आपने इसे किसी अनुभवी शिक्षक से प्रत्यक्ष सीखा हो, और कोई भी सावधानी आप पर लागू न होती हो। इसे कभी खड़े होकर, पानी में, गाड़ी चलाते हुए या शुरुआती के रूप में अकेले न करें।
  2. ज़मीन पर किसी स्थिर पालथी वाले आसन में मज़बूती से बैठें, आसपास दीवार या तकिए हों। पेट खाली हो, आंखें बंद।
  3. नाक से 6 गिनती तक धीरे-धीरे सांस लें।
  4. जैसा शिक्षक ने दिखाया हो, ठुड्डी को छाती की ओर झुकाकर (जालंधर बंध) अधिकतम 10 गिनती तक सांस रोकें। चेहरा और कंधे ढीले रखें।
  5. ठुड्डी उठाएं, फिर नाक से 8 गिनती तक बहुत धीरे-धीरे सांस छोड़ें।
  6. बीच में सामान्य सांसें लेते हुए 3 राउंड से ज़्यादा न करें। चक्कर, झनझनाहट या धुंधला दिखने के पहले संकेत पर रुकें, और ठीक होने तक सामान्य सांस लें।

लाभ

  • परंपरा में कहा गया है कि यह मन में गहरी स्थिरता लाता है, जो इसके नाम की “मूर्छा” है
  • हठयोग में परंपरागत रूप से ध्यान की ओर एक कदम के रूप में किया जाता है
  • बहुत धीमी, नियंत्रित सांस छोड़ना सिखाता है
  • इसकी सुरक्षा या किसी विशेष स्वास्थ्य लाभ का आधुनिक शोध समर्थन नहीं करता

सावधानियाँ

  • उन्नत है और शुरुआती लोगों के लिए कभी नहीं: इससे बेहोशी हो सकती है। केवल अनुभवी शिक्षक के साथ, बैठकर सीखें और पहले चक्कर पर रुक जाएं
  • हाई या लो ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, मिर्गी या दौरे, गर्भावस्था, ग्लूकोमा या वर्टिगो में कभी नहीं; इनमें से किसी में भी कुंभक नहीं
  • बेहोशी का इतिहास, स्ट्रोक, गर्दन की चोट हो या चक्कर लाने वाली दवाएं ले रहे हों तो नहीं
  • पानी में या उसके पास, खड़े होकर या गाड़ी चलाते हुए कभी सांस न रोकें
  • सिरदर्द, छाती में दर्द, तेज़ धड़कन, धुंधला दिखना या भ्रम हो तो तुरंत रुकें

पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मूर्छा प्राणायाम क्या है?

हठयोग का एक उन्नत कुंभक जिसमें जालंधर बंध के साथ सांस रोकी जाती है और फिर बहुत धीरे सांस छोड़ी जाती है। इसके नाम का अर्थ है “बेहोशी जैसी सांस”, क्योंकि इसका लक्ष्य बेहोशी जैसी स्थिरता है।

क्या मूर्छा प्राणायाम खतरनाक है?

हो सकता है। इससे बेहोशी आ सकती है, और ब्लड प्रेशर की समस्या, हृदय रोग, मिर्गी, गर्भावस्था, ग्लूकोमा या वर्टिगो में यह असुरक्षित है। इसे केवल अनुभवी शिक्षक के साथ सीखें।

मूर्छा प्राणायाम के क्या लाभ हैं?

परंपरा के अनुसार, शांत, आनंदमय मन और ध्यान की तैयारी। इस पर कोई वैज्ञानिक शोध नहीं है।

क्या शुरुआती लोग मूर्छा कर सकते हैं?

नहीं। डायाफ्रामिक ब्रीदिंग, दीर्घ प्राणायाम और भ्रामरी जैसे कोमल अभ्यासों से शुरू करें, और कुंभक केवल शिक्षक के साथ सीखें।

चक्कर आए तो क्या करें?

कुंभक छोड़ दें, ठुड्डी उठाएं और सामान्य सांस लें। बेहोशी जैसा लगे तो पैर ऊपर उठाकर लेट जाएं।

मूर्छा प्राणायाम कैसे करें?

केवल शिक्षक के साथ: बैठें, धीरे सांस लें, ठुड्डी झुकाकर थोड़ी देर सांस रोकें, ठुड्डी उठाएं और बहुत धीरे सांस छोड़ें। पहले चक्कर पर रुक जाएं।

धीरे-धीरे किए जाने पर श्वास अभ्यास ज़्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित हैं। चक्कर, घबराहट या साँस फूलने पर रुक जाएँ, और अगर आपको हृदय या फेफड़ों का रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मिर्गी है या आप गर्भवती हैं तो पहले डॉक्टर से पूछें।

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