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Ubhaya Padangusthasana

उभय पादांगुष्ठासन (बोथ बिग टोज़ पोज़): तैयारी, विधि और सुरक्षा

उभय पादांगुष्ठासन में आप बैठने की हड्डियों पर संतुलन बनाते हैं, पैरों के अंगूठे पकड़ते हैं और दोनों सीधी टांगें सामने ऊपर उठाते हैं। यह कठिन आसन है; आज़माने से पहले तैयारी की शर्तें देख लें।

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उभय पादांगुष्ठासन (बोथ बिग टोज़ पोज़)

उभय पादांगुष्ठासन (बोथ बिग टोज़ पोज़) करने का तरीका, स्टेप बाय स्टेप

  1. दंडासन में बैठें। दोनों घुटने मोड़ें और पैरों को नितंबों के पास लाएं, पैर आपस में मिले हुए ज़मीन पर।
  2. हर पैर के अंगूठे को उसी तरफ के हाथ की पहली दो उंगलियों और अंगूठे से पकड़ें (योगी टो लॉक)। हाथ न पहुंचे तो पैरों पर स्ट्रैप लगाएं।
  3. थोड़ा पीछे झुकें ताकि आप बैठने की हड्डियों पर संतुलित हो जाएं और पैर ज़मीन से उठ जाएं। छाती उठी और पीठ सीधी रखें।
  4. सांस लें और अंगूठे पकड़े हुए धीरे-धीरे दोनों टांगें सामने ऊपर सीधी करें। टांगें तीखे कोण पर ऊपर रहती हैं और बाहें लंबी, कोहनियां थोड़ी बाहर।
  5. टांगों को हल्के से अपनी ओर खींचें, छाती को टांगों की ओर उठाएं और पंजों की ओर ऊपर देखें। कमर को गोल न होने दें।
  6. 10–15 सेकंड (2–3 सांस) तक रुकें और सहज सांस लेते रहें।
  7. सांस छोड़ें, घुटने मोड़ें, अंगूठे छोड़ें और पैर ज़मीन पर रखें। दंडासन में आराम करें।

फायदे और सावधानियां

फायदे

  • दोनों टांगों की हैमस्ट्रिंग और पिंडलियों को गहरा खिंचाव देता है
  • पेट की मांसपेशियों और हिप फ्लेक्सर को मज़बूत करता है
  • रीढ़ को सीधा रखने वाली पीठ की मांसपेशियों को मज़बूत करता है
  • छोटे आधार पर संतुलन और एकाग्रता का अभ्यास कराता है
  • नावासन और दूसरे कठिन बैठे संतुलन आसनों के लिए ज़रूरी नियंत्रण बनाता है

इन स्थितियों में न करें या बदलाव के साथ करें

  • स्लिप डिस्क, साइटिका या कमर का तेज़ दर्द — न करें; सीधी टांगों के खिंचाव से कमर गोल होकर उस पर भार पड़ता है
  • हैमस्ट्रिंग की चोट — ठीक होने तक न करें, फिर घुटने मोड़कर अभ्यास करें
  • गर्भावस्था, हर्निया या पेट की हाल की सर्जरी — न करें
  • टेलबोन (कॉक्सिक्स) में दर्द — मुड़े कंबल पर बैठें या आसन छोड़ दें
  • गर्दन की समस्या — अष्टांग में इस्तेमाल होने वाला हलासन से लुढ़ककर आने का तरीका न आज़माएं; बैठी स्थिति से आसन में आएं

पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

उभय पादांगुष्ठासन का अर्थ क्या है?

उभय का अर्थ है दोनों, पाद का अर्थ है पैर और अंगुष्ठ का अर्थ है अंगूठा। यह दोनों पैरों के अंगूठे पकड़ने वाला आसन है, जिसे डबल बिग टो पोज़ भी कहते हैं।

उभय पादांगुष्ठासन के फायदे क्या हैं?

यह हैमस्ट्रिंग और पिंडलियों को खींचता है, पेट की मांसपेशियों, हिप फ्लेक्सर और पीठ को मज़बूत करता है, और संतुलन व एकाग्रता का अभ्यास कराता है।

क्या उभय पादांगुष्ठासन शुरुआत करने वालों के लिए अच्छा है?

पूरे रूप में नहीं। शुरुआती लोग पहले घुटने मोड़कर, स्ट्रैप के साथ या लेटकर किया जाने वाला रूप करें।

उभय पादांगुष्ठासन और नावासन में क्या अंतर है?

नावासन में बाहें आगे बढ़ती हैं और टांगें खुली रहती हैं। उभय पादांगुष्ठासन में हाथ अंगूठे पकड़ते हैं और टांगें पास खींची जाती हैं, इसलिए हैमस्ट्रिंग का खिंचाव कहीं ज़्यादा होता है।

इस आसन में मैं पीछे क्यों लुढ़क जाता हूं?

आपकी पीठ गोल हो रही है। घुटने मोड़ें, छाती उठाएं और टांगें सीधी करने से पहले बैठने की हड्डियों के अगले हिस्से पर संतुलन पाएं।

उभय पादांगुष्ठासन किसे नहीं करना चाहिए?

स्लिप डिस्क, साइटिका, कमर के तेज़ दर्द, हैमस्ट्रिंग की चोट, हर्निया, पेट की सर्जरी के बाद और गर्भावस्था में इसे न करें।

यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है। अगर आप गर्भवती हैं, कोई बीमारी है या चोट लगी है, तो योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें। दर्द, चक्कर या सांस फूलने पर तुरंत रुक जाएं।

Both Big Toes Pose
घुमाने के लिए खींचें · रीसेट के लिए दो बार टैप करें
उभय पादांगुष्ठासन (बोथ बिग टोज़ पोज़) का अभ्यासआसन: 1
चलाएँ दबाइए। गाइड हर आसन 3D में दिखाता है और बोलकर समझाता है। आकृति को उँगली या माउस से घुमाइए।
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