1. होम
  2. योगासन
  3. अष्टांग नमस्कार (नीज़-चेस्ट-चिन पोज़)
Ashtanga Namaskara

अष्टांग नमस्कार (नीज़-चेस्ट-चिन पोज़): आठ अंगों वाला नमस्कार समझें

अष्टांग नमस्कार सूर्य नमस्कार में प्लैंक और भुजंगासन के बीच आने वाली नीची, इल्ली जैसी मुद्रा है। शरीर के आठ अंग मैट को छूते हैं; 3D आकृति को इसमें उतरते देखें, फिर स्टेप्स अपनाएं।

  • स्तरशुरुआती
  • कितनी देर रुकें10 s
अष्टांग नमस्कार (नीज़-चेस्ट-चिन पोज़)

अष्टांग नमस्कार (नीज़-चेस्ट-चिन पोज़) करने का तरीका, स्टेप बाय स्टेप

  1. प्लैंक पोज़ से शुरू करें, हाथ कंधों के नीचे और शरीर सिर से एड़ी तक एक सीध में।
  2. दोनों घुटने मैट पर टिकाएं और पंजे अंदर की ओर मुड़े रखें।
  3. सांस छोड़ें, कोहनियों को पसलियों के पास सीधे पीछे मोड़ें और छाती को हाथों के बीच नीचे सरकाएं।
  4. ठुड्डी (या गर्दन को आराम चाहिए तो माथा) मैट पर टिकाएं। कूल्हे उठे रहते हैं, इसलिए घुटनों से ठुड्डी तक रीढ़ एक हल्की लहर बनाती है।
  5. मैट पर आठ अंग जांचें: दो पैर, दो घुटने, दो हाथ, छाती और ठुड्डी। पेट ज़मीन से ऊपर रहे।
  6. एक पल रुकें — सूर्य नमस्कार में एक सांस छोड़ने तक, या अलग से अभ्यास करते समय 2–3 सांस।
  7. सांस लेते हुए आगे सरककर भुजंगासन में आ जाएं, या कूल्हे नीचे करके पेट के बल आराम करें।

फायदे और सावधानियां

फायदे

  • चतुरंग की ओर पहले कदम के रूप में हाथों, छाती और कंधों में ताकत बढ़ाता है
  • ऊपरी पीठ को हल्का मोड़ता है और छाती खोलता है
  • नियंत्रित ढंग से नीचे आना सिखाता है, जिससे सूर्य नमस्कार में कंधे सुरक्षित रहते हैं
  • कमर के निचले हिस्से को सुरक्षित रखता है, क्योंकि शरीर का कुछ वज़न घुटने उठाते हैं
  • सूर्य नमस्कार में प्लैंक और भुजंगासन को सहजता से जोड़ता है

इन स्थितियों में न करें या बदलाव के साथ करें

  • गर्भावस्था — इसे छोड़ दें और घुटनों के बल हल्का बदलाव करें
  • कलाई में दर्द या कार्पल टनल — और धीरे नीचे आएं और वज़न घुटनों की ओर रखें
  • कंधे में चोट — आधा ही नीचे आएं, या पूरी तरह लेटकर यह आसन छोड़ दें
  • गर्दन में दर्द — ठुड्डी के बजाय माथा टिकाएं ताकि गर्दन पीछे न मुड़े
  • हाल में पेट या छाती की सर्जरी — जब तक डॉक्टर अनुमति न दें, रुकें

पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अष्टांग नमस्कार क्या है?

अष्टांग नमस्कार (नीज़-चेस्ट-चिन पोज़) सूर्य नमस्कार का छठा चरण है। प्लैंक से आप घुटने, छाती और ठुड्डी को मैट पर लाते हैं और कूल्हे थोड़े उठे रहते हैं, जिससे शरीर के आठ अंग ज़मीन को छूते हैं।

अष्टांग नमस्कार में आठ अंग कौन से हैं?

दो पैर (पंजे), दो घुटने, दो हाथ, छाती और ठुड्डी।

अष्टांग नमस्कार के फायदे क्या हैं?

यह हाथों, छाती और कंधों को मज़बूत करता है, ऊपरी पीठ को हल्का मोड़ता है और नियंत्रित ढंग से नीचे आना सिखाता है। शुरुआती लोगों के लिए यह चतुरंग की ओर ज़्यादा सुरक्षित कदम है।

क्या अष्टांग नमस्कार और योग के आठ अंग एक ही हैं?

नहीं। इस आसन में शरीर के आठ अंग ज़मीन को छूते हैं। योग के आठ अंग पतंजलि के बताए अभ्यास के आठ चरण हैं, यम से लेकर समाधि तक।

क्या नीज़-चेस्ट-चिन पोज़ और नीज़-टू-चेस्ट पोज़ एक ही हैं?

नहीं। नीज़-टू-चेस्ट पोज़ (अपानासन) पीठ के बल लेटकर घुटनों को गले लगाकर किया जाता है। नीज़-चेस्ट-चिन पोज़ पेट की ओर मुंह करके, कूल्हे उठाकर किया जाता है।

कुछ लोग इसकी जगह चतुरंग क्यों करते हैं?

अष्टांग विन्यास और कई विन्यास क्लास में चतुरंग से नीचे आया जाता है, जिसमें ज़्यादा ताकत चाहिए। हठ योग और भारतीय सूर्य नमस्कार में आमतौर पर अष्टांग नमस्कार किया जाता है, जो कंधों के लिए आसान है।

क्या गर्भावस्था में अष्टांग नमस्कार कर सकते हैं?

इससे बचना बेहतर है। छाती ज़मीन पर लाने से पेट मैट के पास आता है और उस पर ज़ोर पड़ता है। इसकी जगह घुटनों के बल हल्का बदलाव करें और अपने डॉक्टर की सलाह मानें।

यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है। अगर आप गर्भवती हैं, कोई बीमारी है या चोट लगी है, तो योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें। दर्द, चक्कर या सांस फूलने पर तुरंत रुक जाएं।

Knees-Chest-Chin Pose
घुमाने के लिए खींचें · रीसेट के लिए दो बार टैप करें
अष्टांग नमस्कार (नीज़-चेस्ट-चिन पोज़) का अभ्यासआसन: 1
चलाएँ दबाइए। गाइड हर आसन 3D में दिखाता है और बोलकर समझाता है। आकृति को उँगली या माउस से घुमाइए।
0
तैयार

    अपनी भाषा चुनें