पर्यंकासन (काउच पोज़) करने का तरीका, स्टेप बाय स्टेप
- घुटनों को मिलाकर और पैरों को कूल्हों से थोड़ा चौड़ा रखकर घुटनों के बल बैठें। एड़ियों के बीच वीरासन में बैठ जाएं, पंजों का ऊपरी हिस्सा मैट पर सपाट।
- हाथों पर पीछे झुकें, फिर एक-एक कोहनी करके अग्रबाहुओं पर आ जाएं। दोनों घुटने ज़मीन पर और पास-पास रखें।
- कोहनियों को नीचे दबाएं और छाती को ऊंचा उठाते हुए ऊपरी पीठ को मोड़ें। सिर को धीरे-धीरे पीछे जाने दें जब तक सिर का ऊपरी हिस्सा मैट पर हल्के से न टिक जाए।
- ज़्यादातर वज़न कोहनियों और पैरों में रखें, सिर पर नहीं। छाती की हड्डी को थोड़ा और उठाएं ताकि गर्दन लंबी रहे।
- अगर आप स्थिर हैं, तो बाहों को सिर के ऊपर ले जाएं, मोड़ें और हर कोहनी को विपरीत हाथ से पकड़ें। मुड़ी हुई बाहें सिर के पीछे ज़मीन पर टिकाएं।
- लगभग 20 सेकंड (3–4 धीमी सांसें) रुकें और सांस छाती के अगले हिस्से में भरें।
- बाहर आने के लिए हाथ वापस बगल में लाएं, कोहनियों पर आएं, सिर का पिछला हिस्सा और फिर पीठ ज़मीन पर सरकाएं। कोहनियों पर दबाव देकर बैठें और एक-एक पैर सीधा करें।
फायदे और सावधानियां
फायदे
- जांघों के अगले हिस्से (क्वाड्रिसेप्स), घुटनों और पंजों के ऊपरी हिस्से में खिंचाव लाता है
- छाती और कंधों के अगले हिस्से को खोलता है
- गर्दन और गले के अगले हिस्से को लंबा करता है
- ऊपरी और निचली पीठ की उन मांसपेशियों को मज़बूत करता है जो मोड़ को संभालती हैं
- ऊपरी छाती में भरपूर सांस लेने को बढ़ावा देता है
- उष्ट्रासन और कपोतासन जैसे गहरे बैकबेंड के लिए शरीर को तैयार करता है
इन स्थितियों में न करें या बदलाव के साथ करें
- घुटने की चोट, मेनिस्कस की समस्या या घुटना प्रत्यारोपण — यह आसन न करें; घुटने भार के साथ पूरी तरह मुड़ते हैं
- गर्दन की समस्या या सर्वाइकल डिस्क की दिक्कत — सिर पर वज़न न डालें; इसकी जगह सिर का पिछला हिस्सा बोल्स्टर पर टिकाएं
- कमर दर्द, स्लिप डिस्क या स्पॉन्डिलोलिस्थीसिस — जब तक फिज़ियोथेरेपिस्ट अनुमति न दें, गहरे मोड़ से बचें
- हाई या लो ब्लड प्रेशर, वर्टिगो या चक्कर — बहुत धीरे-धीरे अंदर-बाहर आएं और सिर भारी या हल्का लगे तो रुकें
- गर्भावस्था — यह गहरा बैकबेंड न करें; इसकी जगह बोल्स्टर पर सहारे वाले लेटकर किए जाने वाले आसन चुनें
पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
योग में पर्यंकासन क्या है?
पर्यंकासन (काउच पोज़) घुटनों के बल किया जाने वाला बैकबेंड है। आप एड़ियों के बीच बैठते हैं, पीछे लेटते हैं, छाती को ऊपर उठाकर मोड़ बनाते हैं और सिर का ऊपरी हिस्सा ज़मीन पर हल्के से टिकाते हैं, बाहें सिर के ऊपर मुड़ी रहती हैं।
क्या पर्यंकासन और काउच स्ट्रेच एक ही हैं?
नहीं। काउच स्ट्रेच एक पैर का क्वाड्रिसेप्स और हिप फ्लेक्सर स्ट्रेच है, जिसमें पिंडली सोफे या दीवार से टिकी होती है। पर्यंकासन दोनों पैर मोड़कर किया जाने वाला पूरा बैकबेंड है।
क्या पर्यंकासन शुरुआती लोगों का आसन है?
नहीं। यह मध्यम स्तर का आसन है। शुरुआती लोगों को पहले वीरासन और बोल्स्टर पर सुप्त वीरासन का अभ्यास करना चाहिए, और जब दोनों घुटनों के लिए आसान लगें तभी आगे बढ़ना चाहिए।
पर्यंकासन में कितनी देर रुकना चाहिए?
लगभग 20 सेकंड (3–4 सांसें) से शुरू करें। अभ्यास के साथ, अगर सांस सहज रहे और गर्दन हल्की लगे, तो आप एक मिनट तक रुक सकते हैं।
पर्यंकासन में गर्दन में क्यों महसूस होता है?
आमतौर पर इसलिए कि सिर पर बहुत ज़्यादा वज़न है। कोहनियों को नीचे दबाएं, छाती और ऊंची उठाएं, या सिर का पिछला हिस्सा ब्लॉक पर टिकाएं।
पर्यंकासन किन्हें नहीं करना चाहिए?
घुटने की चोट या घुटना प्रत्यारोपण, गर्दन की समस्या, कमर दर्द या डिस्क की समस्या हो, और गर्भावस्था में, इसे न करें। ब्लड प्रेशर की समस्या या चक्कर आने पर खास सावधानी रखें।
पर्यंकासन के बाद क्या करना चाहिए?
धीरे-धीरे बैठें, पैर सीधे करें, फिर पीठ को आराम देने के लिए बालासन या कोई हल्का आगे झुकने वाला आसन करें।
यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है। अगर आप गर्भवती हैं, कोई बीमारी है या चोट लगी है, तो योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें। दर्द, चक्कर या सांस फूलने पर तुरंत रुक जाएं।








