कैसे करें, चरण-दर-चरण
- रीढ़ सीधी और ढीली रखकर बैठें: पालथी मारकर, घुटनों के बल या पैर ज़मीन पर सपाट रखकर कुर्सी पर। हाथों का पिछला भाग जाँघों या घुटनों पर टिकाएँ।
- दोनों हाथों में कनिष्ठा उंगली मोड़ें और उसका सिरा अंगूठे के सिरे पर लाएँ।
- तर्जनी, मध्यमा और अनामिका को सीधा पर नरम रखें, आपसे दूर की ओर।
- दोनों सिरों को बस हल्के से दबाएँ, इतना कि स्पर्श महसूस हो।
- आँखें बंद करें और 5–15 मिनट नाक से धीरे-धीरे साँस लें। फिर उंगलियाँ छोड़ें और हाथों को हल्के से झटकें।
लाभ
- रूखेपन के लिए परंपरागत रूप से प्रयोग: रूखी त्वचा, सूखी आँखें और सूखा मुँह
- जल तत्व को संतुलित करने के लिए परंपरागत रूप से प्रयोग, जिसे आयुर्वेद शरीर के तरल और लचीलेपन से जोड़ता है
- गर्म मौसम में ठंडक देने वाले, शांत करने वाले अभ्यास के रूप में परंपरागत रूप से प्रयोग
- पर्याप्त पानी पीने की रोज़ाना याद दिलाने के रूप में परंपरागत रूप से प्रयोग
- कुछ मिनट की शांत, धीमी साँस देती है, जो रोज़मर्रा के तनाव को कम कर सकती है
सावधानियाँ
- सर्दी, खाँसी, ज़्यादा बलगम या शरीर में पानी रुकने से सूजन हो तो कई शिक्षक इसे न करने की सलाह देते हैं
- यह पानी पीने, त्वचा की देखभाल या किसी भी निर्धारित इलाज का विकल्प नहीं है
- लगातार सूखी आँखें, सूखा मुँह या त्वचा की समस्याओं के चिकित्सीय कारण हो सकते हैं, इसलिए डॉक्टर से जाँच करवाएँ
पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
वरुण मुद्रा क्या है?
वरुण मुद्रा एक हस्त मुद्रा है जिसमें कनिष्ठा का सिरा अंगूठे के सिरे को छूता है और बाकी तीन उंगलियाँ सीधी रहती हैं। इसका नाम जल के देवता वरुण के नाम पर है, और परंपरागत रूप से इसका प्रयोग रूखेपन और ठंडक व शांति के अहसास के लिए होता है।
वरुण मुद्रा रोज़ कितनी देर करें?
दिन में तीन बार तक 15 मिनट करें, या कुल 30–45 मिनट। शुरुआत करने वाले 5 मिनट से शुरू करके एक-दो हफ़्तों में समय बढ़ा सकते हैं।
वरुण मुद्रा के लाभ और दुष्प्रभाव क्या हैं?
परंपरागत रूप से इसका प्रयोग रूखी त्वचा, सूखी आँखों और सूखे मुँह के लिए, और शरीर को ठंडक देने के लिए होता है। इसका कोई ज्ञात शारीरिक दुष्प्रभाव नहीं है, पर सर्दी, खाँसी या पानी रुकने से सूजन होने पर कई शिक्षक इससे बचते हैं।
क्या वरुण मुद्रा त्वचा और बालों के लिए अच्छी है?
बालों और त्वचा के लिए वरुण मुद्रा के लाभ पारंपरिक दावे हैं जिनकी अध्ययनों में जाँच नहीं हुई है। पर्याप्त पानी पिएँ, मॉइस्चराइज़र लगाएँ और ठीक न होने वाली त्वचा समस्या के लिए डॉक्टर को दिखाएँ।
वरुण मुद्रा कैसे करते हैं और इसके लाभ क्या हैं?
आराम से बैठें, दोनों हाथों में कनिष्ठा का सिरा अंगूठे के सिरे से मिलाएँ, बाकी तीन उंगलियाँ सीधी रखें और 5–15 मिनट धीरे-धीरे साँस लें। पारंपरिक लाभ हैं: रूखेपन से राहत और ठंडक व शांति का अहसास।
क्या वरुण मुद्रा के लाभ अलग-अलग भाषाओं में अलग बताए जाते हैं?
नहीं। हिन्दी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मराठी, बांग्ला और अंग्रेज़ी में वरुण मुद्रा के लाभ एक जैसे हैं, क्योंकि भाषा बदलने से अभ्यास नहीं बदलता। YogaMitra के निर्देशित सत्र 28 भाषाओं में उपलब्ध हैं।
योग में मुद्राएँ क्या हैं और उनके क्या लाभ हैं?
मुद्राएँ हाथों की वे स्थितियाँ हैं जो श्वास अभ्यास और ध्यान के दौरान रखी जाती हैं। परंपरा हर मुद्रा को किसी गुण से जोड़ती है, जैसे एकाग्रता, शांति या ऊर्जा। विशिष्ट स्वास्थ्य प्रभावों पर शोध सीमित है।
मुद्राएँ एकाग्रता और विश्राम की एक पारंपरिक साधना हैं। विशेष स्वास्थ्य प्रभावों पर शोध सीमित है; इन्हें चिकित्सा देखभाल के साथ अपनाएँ, उसकी जगह नहीं।