एक पाद कौंडिन्यासन (सेज कौंडिन्य पोज़) करने का तरीका, स्टेप बाय स्टेप
- कलाइयों, कंधों, कूल्हों और कोर को वार्म अप करें, एक ट्विस्ट सहित। पैर और घुटने मिलाकर उकड़ूं बैठें और हथेलियों को छाती के सामने जोड़ें।
- दाहिनी ओर मुड़ें और बाईं ऊपरी भुजा को दाहिनी जांघ के बाहर फंसाएं (परिवृत्त प्रार्थना स्क्वाट)।
- दोनों हाथ पैरों के दाहिनी ओर मैट पर सपाट रखें, कंधों जितनी दूरी पर। चतुरंग की तरह कोहनियों को लगभग 90 डिग्री तक पीछे मोड़ें, ताकि दाहिना कूल्हा बाईं ऊपरी भुजा की शेल्फ पर टिके।
- आगे झुकें, वज़न हाथों पर डालें और दोनों पैर उठाएं। यह पार्श्व बकासन (साइड क्रो) है।
- दाहिने पैर को बाईं भुजा के ऊपर से बगल में सीधा फैलाएं, एड़ी से धक्का देते हुए।
- बाएं पैर को पीछे सीधा, कूल्हों की ऊंचाई तक फैलाएं। कोहनियां अंदर सटी रखें, छाती आगे और नज़र सामने। लगभग 10 सेकंड (1–3 सांस) तक रुकें।
- दोनों घुटने मोड़कर वापस पार्श्व बकासन में आएं, पैर नीचे लाएं और बालासन में आराम करें। बाईं ओर मुड़कर दोहराएं।
फायदे और सावधानियां
फायदे
- भुजाओं, कंधों, छाती और कलाइयों में ताकत बढ़ाता है
- मरोड़ के ज़रिए पेट की मांसपेशियों और ऑब्लिक्स पर काम करता है
- हैमस्ट्रिंग और कमर के बगल के हिस्से को स्ट्रेच करता है
- हाथों पर पूरे शरीर का संतुलन और नियंत्रण सुधारता है
- द्वि पाद कौंडिन्यासन जैसे दूसरे मरोड़ वाले आर्म बैलेंस के लिए तैयार करता है
इन स्थितियों में न करें या बदलाव के साथ करें
- कलाई, कोहनी या कंधे की चोट, या कार्पल टनल सिंड्रोम — यह आसन न करें
- कमर के निचले हिस्से में दर्द, डिस्क की समस्या या सैक्रोइलियक (SI) जोड़ का दर्द — वज़न वाले मरोड़ से बचें
- हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या ग्लूकोमा — न करें; सिर नीचा होता है और मेहनत ज़्यादा होती है
- गर्भावस्था — न करें; गहरे मरोड़ और पेट पर दबाव उपयुक्त नहीं हैं
- पेट की हाल की सर्जरी या हर्निया — कोर पर ज़्यादा ज़ोर से बचें
- अगर आप अभी पार्श्व बकासन और चतुरंग नियंत्रण के साथ नहीं रख पाते, तो पहले उन्हीं का अभ्यास करते रहें
पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
एक पाद कौंडिन्यासन क्या है?
यह ऋषि कौंडिन्य के नाम पर रखा गया एक उन्नत, मरोड़ वाला आर्म बैलेंस है। आप मुड़ी भुजाओं पर संतुलन बनाते हैं, एक कूल्हा विपरीत ऊपरी भुजा पर होता है, एक पैर बगल में और दूसरा पीछे फैला होता है।
एक पाद कौंडिन्यासन 1 और 2 में क्या अंतर है?
वेरिएशन 1 में मरोड़ होता है: पार्श्व बकासन से एक पैर बगल में और दूसरा पीछे जाता है। वेरिएशन 2 में मरोड़ नहीं होता: आगे वाला पैर उसी तरफ की भुजा पर टिककर आगे फैलता है और पीछे वाला पैर पीछे फैलता है।
एक पाद कौंडिन्यासन में कितनी देर रुकना चाहिए?
हर तरफ लगभग 10 सेकंड, या 1–3 सांस। छोटे, नियंत्रित होल्ड सबसे अच्छे हैं।
कौंडिन्यासन से पहले किन आसनों का अभ्यास करना चाहिए?
पार्श्व बकासन, बकासन, चतुरंग, परिवृत्त प्रार्थना स्क्वाट और अर्ध हनुमानासन जैसे हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच।
एक पाद कौंडिन्यासन की सावधानियां क्या हैं?
कलाई, कोहनी या कंधे की चोट, कमर के निचले हिस्से या SI जोड़ का दर्द, हर्निया, पेट की हाल की सर्जरी, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, ग्लूकोमा और गर्भावस्था में इससे बचें।
कौंडिन्यासन में मेरा चेहरा ज़मीन पर क्यों गिरता है?
आमतौर पर कोहनियां बाहर फैल जाती हैं या कोर ढीला पड़ जाता है। कोहनियां अंदर सटी रखें, कंधे कोहनियों की ऊंचाई पर रखें और सीखते समय चेहरे के सामने कुशन रखें।
यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है। अगर आप गर्भवती हैं, कोई बीमारी है या चोट लगी है, तो योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें। दर्द, चक्कर या सांस फूलने पर तुरंत रुक जाएं।








