चमत्कारासन (वाइल्ड थिंग) करने का तरीका, स्टेप बाय स्टेप
- पहले अधोमुख श्वानासन, प्लैंक और साइड प्लैंक के कुछ राउंड से वार्म-अप करें। अधोमुख श्वानासन से शुरू करें।
- आगे खिसकें और दाएं पैर के बाहरी किनारे पर घूम जाएं। बायां पैर ऊपर रखें, बाईं बांह उठाएं और दाएं हाथ पर साइड प्लैंक में आएं, दायां हाथ कंधे के नीचे।
- बायां घुटना मोड़ें और बायां पैर अपने पीछे ले जाकर पंजे का अगला हिस्सा दाएं पैर से लगभग कूल्हों जितनी दूरी पर मैट पर रखें। दायां पैर लंबा रखें।
- दाएं हाथ और दोनों पैरों से मज़बूती से दबाएं और कूल्हों को ऊंचा उठाएं। छाती को छत की ओर घूमने दें।
- बाईं बांह को सिर के ऊपर से पीछे ले जाएं, हथेली पीछे ज़मीन की ओर। सिर को उतना ही पीछे जाने दें जितना गर्दन को आराम से ठीक लगे।
- लगभग 15 सेकंड (2–3 सांसें) रुकें, दायां कंधा मज़बूत और कान से दूर रखें।
- बाहर आने के लिए बाईं बांह वापस ऊपर लाएं, कूल्हे उठाएं और बायां पैर घुमाकर साइड प्लैंक या अधोमुख श्वानासन में लौटें। आराम करें, फिर बाएं हाथ पर दोहराएं।
फायदे और सावधानियां
फायदे
- छाती और कंधों के अगले हिस्से को खोलता है
- उठी हुई तरफ हिप फ्लेक्सर्स और शरीर के अगले हिस्से में खिंचाव लाता है
- सहारा देने वाली बांह, कलाई और कंधे को मज़बूत करता है
- कूल्हों को ऊंचा रखने के लिए ग्लूट्स और पैरों के पिछले हिस्से पर काम करता है
- गहरे बैकबेंड के लिए कंधों की स्थिरता और शरीर पर नियंत्रण बनाता है
- ऊर्जा से भर देता है, इसलिए फ्लो क्लास में यह लोकप्रिय शिखर आसन है
इन स्थितियों में न करें या बदलाव के साथ करें
- कलाई में दर्द या कार्पल टनल सिंड्रोम — यह आसन न करें या अग्रबाहु वाले साइड प्लैंक से आज़माएं
- कंधे की चोट, रोटेटर कफ की समस्या या कंधा उतरने का इतिहास — बैकबेंड में एक बांह पर भार डालने से बचें
- कमर या सैक्रोइलियक (SI) जोड़ में दर्द — ऊंचाई कम रखें या कोई सौम्य बैकबेंड चुनें
- गर्दन में दर्द — सिर को पीछे गिराने के बजाय रीढ़ की सीध में रखें
- गर्भावस्था — पूरा आसन न करें; निचला घुटना ज़मीन पर रखकर सहारे वाला साइड प्लैंक ज़्यादा सुरक्षित है, वह भी अपनी मिडवाइफ या डॉक्टर की अनुमति से
पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
योग में चमत्कारासन (वाइल्ड थिंग) क्या है?
चमत्कारासन (वाइल्ड थिंग) एक हाथ पर किया जाने वाला बैकबेंड है। साइड प्लैंक से आप ऊपर वाला पैर पीछे रखते हैं, कूल्हे उठाते हैं और खाली बांह को सिर के ऊपर ले जाते हैं ताकि छाती छत की ओर खुल जाए।
क्या फ्लिप डॉग और वाइल्ड थिंग एक ही हैं?
लगभग। फ्लिप डॉग में आमतौर पर थ्री-लेग्ड डॉग से कूल्हे पलटकर आकार में आते हैं; वाइल्ड थिंग अक्सर साइड प्लैंक से किया जाता है। अंतिम मुद्रा लगभग एक जैसी होती है।
क्या चमत्कारासन शुरुआती लोगों के लिए अच्छा है?
यह मध्यम स्तर का आसन है। साइड प्लैंक स्थिर लगने के बाद शुरुआती लोग इसे निचला घुटना मैट पर और खाली हाथ कूल्हे पर रखकर आज़मा सकते हैं।
चमत्कारासन में कितनी देर रुकना चाहिए?
हर तरफ लगभग 15 सेकंड, या 2–3 सांसें। जैसे ही सहारा देने वाला कंधा नीचे धंसने लगे, बाहर आ जाएं।
वाइल्ड थिंग योग के फायदे क्या हैं?
यह छाती, कंधों और हिप फ्लेक्सर्स को खोलता है और सहारा देने वाली बांह, कलाई, कंधे और ग्लूट्स को मज़बूत करता है। यह संतुलन और कंधों पर नियंत्रण का भी अभ्यास कराता है।
चमत्कारासन में कलाई में दर्द क्यों होता है?
आम कारण है हथेली की एड़ी पर बहुत ज़्यादा वज़न। उंगलियां फैलाएं, उंगलियों की जड़ों और पोरों से दबाएं, और पहले कलाइयों का वार्म-अप करें। दर्द बना रहे तो यह आसन न करें।
चमत्कारासन किन्हें नहीं करना चाहिए?
जिन्हें कलाई, कंधे, गर्दन, कमर या SI जोड़ की चोट हो, और गर्भवती महिलाओं को पूरा आसन नहीं करना चाहिए या किसी विशेषज्ञ से सुरक्षित रूप के बारे में पूछना चाहिए।
यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है। अगर आप गर्भवती हैं, कोई बीमारी है या चोट लगी है, तो योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें। दर्द, चक्कर या सांस फूलने पर तुरंत रुक जाएं।








