प्रणाम मुद्रा (प्रेयर पोज़) करने का तरीका, स्टेप बाय स्टेप
- मैट के आगे वाले हिस्से पर पैरों को मिलाकर या थोड़ा खोलकर खड़े हों, वज़न दोनों पैरों पर बराबर रखें।
- एक पल के लिए हाथों को ढीला लटकने दें, फिर कंधों को ऊपर, पीछे और नीचे घुमाएं।
- हथेलियों को छाती के सामने जोड़ें, अंगूठे हल्के से छाती की हड्डी को छूते हुए और उंगलियां ऊपर की ओर।
- हथेलियों को हल्के और बराबर दबाव से आपस में दबाएं। कोहनियों को कलाइयों से थोड़ा नीचे, बगल की ओर ढीला छोड़ दें।
- रीढ़ को लंबा करें, ठुड्डी सीधी रखें और आंखें बंद करें या नज़र को सामने फर्श पर हल्के से टिकाएं।
- नाक से 15–30 सेकंड (3–6 सांस) तक धीरे-धीरे सांस लें और ध्यान को सांस पर टिकने दें।
- खत्म करने के लिए आंखें खोलें, हाथों को बगल में छोड़ दें, या सांस लेते हुए हाथ ऊपर उठाकर सूर्य नमस्कार शुरू करें।
फायदे और सावधानियां
फायदे
- अभ्यास से पहले और बाद में ध्यान को वर्तमान पल में लाता है
- सीधे और संतुलित तरीके से खड़े होने को बढ़ावा देता है
- हथेलियों के हल्के दबाव से छाती, कंधों और बाहों को धीरे से सक्रिय करता है
- सांस को धीमा और एक समान करता है, जो कई लोगों को शांत करने वाला लगता है
- सूर्य नमस्कार की लय तय करता है और साफ शुरुआत व अंत का संकेत देता है
- बच्चों, बुज़ुर्गों और बिल्कुल नए लोगों के लिए भी आसान
इन स्थितियों में न करें या बदलाव के साथ करें
- चक्कर या लो ब्लड प्रेशर — आंखें खुली रखें, पैर थोड़े खुले रखें और पास में दीवार हो
- कमज़ोर संतुलन — बैठकर अभ्यास करें, या पीठ को दीवार के पास रखकर खड़े हों
- कलाई में दर्द या कार्पल टनल सिंड्रोम — हथेलियों का दबाव बहुत हल्का और कलाइयां ढीली रखें; उंगलियों में झनझनाहट हो तो रुक जाएं
- कंधे या कोहनी में दर्द — हाथों को थोड़ा नीचे रखें या कोहनियों को शरीर के पास आने दें
किन स्वास्थ्य समस्याओं में यह आसन किया जाता है
पूरी गाइड पढ़ें (अंग्रेज़ी में)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रणामासन क्या है और इसके फायदे क्या हैं?
प्रणामासन खड़े होकर छाती के सामने हथेलियां जोड़ने वाली प्रार्थना मुद्रा है। यह सांस को स्थिर करता है, ध्यान केंद्रित करता है, सही तरीके से खड़े होने में मदद करता है और सूर्य नमस्कार के हर चक्र की शुरुआत और अंत का संकेत है।
प्रणामासन का अर्थ क्या है?
“प्रणाम” का अर्थ है सम्मान से झुकना या अभिवादन करना और “आसन” का अर्थ है मुद्रा, यानी प्रणामासन का अर्थ है अभिवादन या नमस्कार की मुद्रा। अंग्रेज़ी में इसे प्रेयर पोज़ या नमस्ते पोज़ कहते हैं।
प्रणामासन में कितनी देर रुकना चाहिए?
सूर्य नमस्कार में एक सांस छोड़ने तक। अलग से करें तो 15–30 सेकंड, या छोटे खड़े ध्यान के रूप में इससे ज़्यादा।
क्या प्रणामासन और अंजलि मुद्रा एक ही हैं?
अंजलि मुद्रा जुड़ी हुई हथेलियों वाला हाथ का इशारा है। प्रणामासन पूरा खड़ा आसन है जिसमें यह मुद्रा इस्तेमाल होती है।
प्रणामासन और समस्थिति में क्या अंतर है?
समस्थिति अष्टांग योग में तैयार खड़ी स्थिति का नाम है, जिसमें आमतौर पर हाथ बगल में रहते हैं। प्रणामासन में इसके साथ हथेलियां छाती के सामने जुड़ी होती हैं।
योग के बाद लोग नमस्ते क्यों कहते हैं?
इसका अर्थ है “मैं आपको नमन करता/करती हूं”, और यह समूह को धन्यवाद देने और अभ्यास समाप्त करने का सम्मानजनक तरीका है। इसे कहना ज़रूरी नहीं है।
क्या प्रणामासन किसी को नहीं करना चाहिए?
ऐसे मामले बहुत कम हैं। जिन्हें स्थिर खड़े रहने पर चक्कर आते हैं, वे आंखें खुली रखें और दीवार के पास खड़े हों। कलाई में दर्द या कार्पल टनल में हथेलियों का दबाव बहुत हल्का रखें।
यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है। अगर आप गर्भवती हैं, कोई बीमारी है या चोट लगी है, तो योग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें। दर्द, चक्कर या सांस फूलने पर तुरंत रुक जाएं।








