कैसे करें, चरण-दर-चरण
- कुर्सी या ज़मीन पर सीधे बैठें और हाथ जाँघों पर रखें, हथेलियाँ ऊपर।
- हर हाथ में छोटी उँगली नीचे मोड़ें, ताकि उसका सिरा अँगूठे की मांसल जड़ पर टिके।
- अँगूठे को मुड़ी छोटी उँगली के ऊपर लाएँ और बस इतना हल्का दबाएँ कि वह टिकी रहे।
- तर्जनी, मध्यमा और अनामिका सीधी और ढीली रखें।
- 5–15 मिनट धीरे-धीरे साँस लें, फिर उँगलियाँ छोड़ें और हाथ खोलकर फैलाएँ।
लाभ
- परंपरा में फूलेपन और शरीर में भारी, पानी भरे एहसास के लिए
- आयुर्वेदिक मुद्रा सिद्धांत में जल तत्व को कम करने के लिए
- परंपरा में देर तक बैठने या यात्रा के दौरान, चलने-फिरने और पैर ऊपर रखने के साथ
- परंपरा में धीमी साँस के साथ एक छोटे, शांत विराम के रूप में
सावधानियाँ
- पैरों, चेहरे या पेट की सूजन हृदय, किडनी या लीवर की समस्या का संकेत हो सकती है; डॉक्टर को दिखाएँ।
- एक पैर में दर्द या लालिमा के साथ सूजन हो, या सूजन के साथ साँस फूले या सीने में दर्द हो, तो तुरंत मदद लें।
- मुद्रा करने के कारण पेशाब बढ़ाने वाली गोलियाँ (डाइयूरेटिक) या कोई और दवा बंद न करें।
- इसे केवल तभी करें जब फूलापन महसूस हो; यह रोज़ लंबे समय तक करने के लिए नहीं है, और पानी की कमी या मुँह सूखने में नहीं करनी चाहिए।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जलोदर नाशक मुद्रा कैसे करते हैं?
छोटी उँगली को मोड़ें ताकि उसका सिरा अँगूठे की जड़ को छुए, फिर अँगूठे से उसे हल्का दबाएँ। बाकी तीन उँगलियाँ सीधी रखें और 5–15 मिनट रुकें।
जलोदर नाशक मुद्रा के क्या लाभ हैं?
परंपरा में इसका उपयोग फूलेपन, पेट फूलने और भारी, पानी भरे एहसास के लिए होता है। इस पर कोई शोध नहीं है, इसलिए इसे चलने-फिरने और कम नमक के साथ एक शांत दिनचर्या मानें।
जलोदर नाशक मुद्रा के फ़ायदे क्या हैं?
इसके फ़ायदे शरीर में कम पानी रुकना और हल्का शरीर बताए जाते हैं। यह सूजन की चिकित्सा का विकल्प नहीं है।
क्या जलोदर नाशक मुद्रा जलोदर (ऐसाइटिस) या सूजन ठीक कर सकती है?
नहीं। जलोदर पेट में पानी भरने (ऐसाइटिस) का पुराना नाम है, जो आमतौर पर लीवर, हृदय या किडनी की गंभीर बीमारी से होता है। इसके लिए डॉक्टर चाहिए, मुद्रा नहीं।
वरुण मुद्रा और जलोदर नाशक मुद्रा में क्या अंतर है?
वरुण मुद्रा में छोटी उँगली का सिरा अँगूठे के सिरे से मिलता है और कहा जाता है कि यह जल बढ़ाती है। जलोदर नाशक मुद्रा में छोटी उँगली अँगूठे के नीचे मुड़ती है और कहा जाता है कि यह जल घटाती है।
इसे कितनी देर करना चाहिए?
जब फूलापन महसूस हो तब दिन में एक-दो बार 5–15 मिनट करें, और हल्का महसूस होते ही बंद कर दें।
मुद्राएँ एकाग्रता और विश्राम की एक पारंपरिक साधना हैं। विशेष स्वास्थ्य प्रभावों पर शोध सीमित है; इन्हें चिकित्सा देखभाल के साथ अपनाएँ, उसकी जगह नहीं।